
Who Is Ami Bera: भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद अमी बेरा ने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के चुनाव में लगातार आठवीं बार जीत हासिल की है। कैलिफोर्निया के तीसरे कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार बेरा ने रिपब्लिकन प्रत्याशी रॉब टकर को हराया। वह 2013 से अमेरिकी संसद में सैक्रामेंटो काउंटी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। अमी बेरा भारतीय मूल के उन नेताओं में शामिल हैं, जो लंबे समय से अमेरिकी राजनीति में सक्रिय हैं। वह मौजूदा कांग्रेस में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले भारतीय-अमेरिकी सांसद हैं। उनकी जीत ऐसे समय में हुई है, जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार, टैरिफ और वीजा नीतियों को लेकर तनाव बना हुआ है।
अमी बेरा इस बार कैलिफोर्निया के तीसरे कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से चुनाव मैदान में थे। कैलिफोर्निया में निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन यानी परिसीमन के बाद उनकी सीट बदली गई थी।
बेरा 2013 से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के सदस्य हैं। वह विदेश मामलों की समिति की पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र से जुड़ी उपसमिति में रैंकिंग सदस्य हैं। इसके अलावा वह हाउस परमानेंट सेलेक्ट कमेटी ऑन इंटेलिजेंस के भी सदस्य हैं।
अमी बेरा ने भारत और अमेरिका के संबंधों से जुड़े कई मुद्दों पर ट्रंप प्रशासन की नीतियों की आलोचना की है। सितंबर 2025 में उन्होंने पांच सदस्यीय अमेरिकी संसदीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए भारत का दौरा किया था। यह दौरा ऐसे समय हुआ था, जब ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा पर 1 लाख डॉलर का शुल्क लगाने की घोषणा की थी।
बेरा ने इस फैसले को बिना पर्याप्त विचार के बनाई गई नीति बताया था। उनका कहना था कि 1,000 से 4,000 डॉलर तक का शुल्क ज्यादा उचित होता। उन्होंने चेतावनी दी थी कि इससे अमेरिकी टेक कंपनियों को नुकसान हो सकता है और कंपनियां भारत के हैदराबाद या बेंगलुरु में अपना कारोबार बढ़ाने का फैसला कर सकती हैं। दिसंबर 2025 में अमेरिकी कांग्रेस की सुनवाई के दौरान भी उन्होंने कहा था कि H-1B वीजा शुल्क अमेरिकी कंपनियों को प्रतिस्पर्धा में नुकसान पहुंचाता है।
रूस से भारत की तेल खरीद के कारण ट्रंप प्रशासन ने भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ लगाया था। इससे भारत पर कुल टैरिफ 50 फीसदी तक पहुंच गया था।
अमी बेरा ने इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए सीधे कूटनीतिक बातचीत की पैरवी की थी। उन्होंने कहा था कि अगर राष्ट्रपति ट्रंप उनसे सलाह मांगते, तो वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन करने और रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने के प्रयासों में भारत की भूमिका तलाशने का सुझाव देते।
उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, इरविन से स्नातक और मेडिकल की पढ़ाई की। इसके बाद करीब 20 साल तक डॉक्टर के रूप में काम किया। उन्होंने कैलिफोर्निया पैसिफिक मेडिकल सेंटर में इंटरनल मेडिसिन के चीफ रेजिडेंट के तौर पर भी सेवाएं दीं।