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ब्रिटिश पीएम के आवास के बाहर भूख हड़ताल, बलूचिस्तान के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग

hunger strike outside UK PM's office: बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचने के लिए लंदन में भूख हड़ताल पर बैठे हैं। इसके लिए उन्होंने ब्रिटेन के पीएम के आधिकारिक निवास के बाहर के स्थान को चुना है।
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Jul 02, 2026
Baloch activist hunger strike over Balochistan.
बलोच एक्टिविस्ट ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास के बाहर भूख हड़ताल पर बैठे। (Photo X/ @Aomar_karim

Baloch activist Hunger Strike London: बलूच कार्यकर्ता ओमार करीम ने लंदन स्थित ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के ऑफिशियल रेजिडेंस 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर भूख हड़ताल शुरू की है। उन्होंने पाकिस्तान पर बलूच राजनीतिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ लगातार कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। साथ ही बलूचिस्तान की स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की अपील की है।

सोशल मीडिया 'एक्स' पर शेयर की गई पोस्ट में ओमार करीम ने कहा, 'भूख हड़ताल गुरुवार को बलूच लोगों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए शुरू हुई और शुक्रवार, 3 जुलाई को शाम 6:30 बजे तक जारी रहेगी।'

ओमार करीम ने बताया कि बलूच अधिकार कार्यकर्ताओं महरंग बलूच और सिबगतुल्लाह शाहजी को हाल ही में उम्रकैद की सजा दिए जाने और बीबो बलूच, बेबर्ग जेहरी और गुलजादी बलूच को लगातार हिरासत में रखे जाने की वजह से यह विरोध हुआ है। इस अन्याय को किसी भी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

उन्होंने अपनी भूख हड़ताल को लेकर कहा कि उनका मकसद बलूच कार्यकर्ताओं को बुरी हालत से निकालने और पाकिस्तान में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर अंतरराष्ट्रीय ध्यान खींचना था।

उन्होंने कहा कि वे गुरुवार और शुक्रवार को 10 डाउनस्ट्रीट के बाहर रहेंगे। इस प्रदर्शन को बाद शुक्रवार को ही किंग चार्ल्स स्ट्रीट स्थित यूके फॉरेन, कॉमनवेल्थ एंड डेवलमपमेंट ऑफिस में शिफ्ट कर देंगे।

ओमार करीम ने इस दौरान लोगों, मीडिया, ससंद सदस्यों, मानवाधिकार संगठनों से बलोच मुद्दे पर प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की, साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बलूचिस्तान का ध्यान खींचा।

बलूचिस्तान में जबरन गायब किए जाने के ट्रेंड आम

आपको बता दें कि पाकिस्तानके बलूचिस्तान में जबरन गायब किए जाने के ट्रेंड आम है। यहां कुछ पीड़ितों को जहां रिहा कर दिया जाता है, वहीं कुछ को लंबी हिरासत झेलनी पड़ती है। यहां अधिकांशतः लोगों को टारगेट किलिंग के शिकार हो जाते हैं। लगातार बढ़ते मानवाधिकारों के उल्लंघन मामलों की वजह से लोगों में असुरक्षा और अविश्वास बढ़ा है। मनमानी गिरफ्तारी, जवाबदेही की कमी ने बलूचिस्तान की स्थिति को दयनीय बना दिया है। यहां शांति, न्याय और सरकारी संस्थाओं में जनता का भरोसा बहाल की तमाम कोशिशें तो हुई, लेकिन यहां के हालत की वजह से ये कमजोर साबित हुई हैं।

Updated on:
02 Jul 2026 03:04 pm
Published on:
02 Jul 2026 02:42 pm