
US Sanctions on Iran : ईरान को चारों तरफ से घेर रहा अमेरिका! तेल, कारोबार और होर्मुज पर ऐसा दबाव कि दुनिया की बढ़ी धड़कन (फोटो सोर्स:@SecScottBessent)
Strait of Hormuz Crisis: ईरान युद्ध अब केवल मिसाइलों और सैन्य मोर्चों तक सीमित नहीं रह गया है। अमेरिका ने तेहरान को आर्थिक रूप से घेरने के लिए नए सिरे से दबाव बढ़ा दिया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इसे बड़े आर्थिक अभियान की शुरुआत बताया है और ईरान से कारोबार करने वाले देशों को भी चेतावनी दी है। दूसरी ओर, तेहरान ने साफ संकेत दिया है कि दबाव बढ़ा तो खाड़ी से तेल की आवाजाही को लेकर स्थिति और गंभीर हो सकती है।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने सोमवार को ईरान के खिलाफ ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ शुरू करने का ऐलान किया। इसका मकसद ईरान की उन आर्थिक और वित्तीय कड़ियों को काटना है, जिनके जरिए तेहरान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैसा और कारोबारी सहयोग मिल रहा है। अमेरिका ने साफ किया है कि कार्रवाई केवल ईरानी संस्थाओं तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि ईरान के साथ कारोबार करने वाली विदेशी कंपनियां और वित्तीय संस्थान भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।
अमेरिकी कदम में डिजिटल एसेट, तकनीक, सोना, विमानन और शिपिंग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है। वॉशिंगटन का संदेश स्पष्ट है। जो देश या संस्थान तेहरान की आर्थिक मदद जारी रखेंगे, उन्हें अमेरिकी प्रतिबंधों का जोखिम उठाना पड़ सकता है।
तेहरान ने अमेरिकी दबाव को खारिज करते हुए संकेत दिया है कि नए प्रतिबंध उसे झुकाने में सफल नहीं होंगे। ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि आर्थिक युद्ध जारी रहा तो खाड़ी क्षेत्र से तेल निर्यात को रोकने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं। यहां सबसे बड़ा दांव होर्मुज जलडमरूमध्य पर है, जहां से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
हालात तब और चिंताजनक हो गए जब ओमान के तट के पास एक तेल टैंकर पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला होने की रिपोर्ट सामने आई। वहीं, ईरान ने कथित नियमों के उल्लंघन को लेकर 45 टैंकरों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है। अमेरिका पहले से ही ईरानी बंदरगाहों के आसपास नौसैनिक नाकाबंदी बनाए हुए है और उसने संकेत दिया है कि इसे लंबे समय तक जारी रखने की क्षमता उसके पास है।
इसी बीच ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी का तेहरान दौरा कूटनीतिक मोर्चे पर उम्मीद की एक किरण है। होर्मुज में समुद्री यातायात को सामान्य करने को लेकर बातचीत की कोशिश जारी है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर की ईरान यात्रा भी इसी व्यापक कूटनीतिक हलचल का हिस्सा मानी जा रही है।
ईरान-अमेरिका टकराव का सबसे बड़ा वैश्विक असर ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। होर्मुज में यातायात बाधित होने से तेल आपूर्ति, बीमा लागत और समुद्री परिवहन पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि हालिया अमेरिकी प्रतिबंधों की घोषणा के बाद तेल कीमतों में तत्काल गिरावट भी देखी गई, लेकिन बाजार की चिंता बनी हुई है।
यानी अमेरिका ने आर्थिक शिकंजा कस दिया है, ईरान ने जवाबी चेतावनी दे दी है और होर्मुज पर तनाव बरकरार है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह आर्थिक दबाव बातचीत का रास्ता खोलता है या युद्ध को एक और खतरनाक मोड़ पर ले जाता है।
Updated on:
25 Aug 2026 06:44 am
Published on:
25 Aug 2026 06:36 am
