बांग्लादेश आम चुनाव में BNP ने 209 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया। 20 साल बाद सत्ता में वापसी हुई है। जबकि नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) ने चुनावों में गड़बड़ी का आरोप लगाया है।
बांग्लादेश में गुरुवार को हुए आम चुनाव ने देश की राजनीति की दिशा बदल दी है। दो दशक से अधिक समय तक चली आवामी लीग की सत्ता के बाद अब राजनीतिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव दिख रहा है। 299 सीटों वाली संसद में बहुमत का आंकड़ा 150 है, जिसे पार करते हुए बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने 209 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। अब तक 286 सीटों के परिणाम घोषित किए जा चुके हैं और देश में 20 साल बाद BNP की सरकार बनने जा रही है। परिणाम सामने आने के बाद नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) ने चुनावों में गड़बड़ी का आरोप लगाया है।
NCP के प्रवक्ता आसिफ महमूद सजीब भुइयां ने ढाका के बांग्लामोटर स्थित पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि गलत वोट गिनकर BNP उम्मीदवार को जिताने की कोशिश हो रही है। भुइयां ने आगे यह भी कहा कि ढाका की 15 सीटों पर जब 20 हजार वोटों का अंतर था, तब बीएनपी उम्मीदवार फेसबुक पर खुद को विजेता घोषित कर चुके थे। NCP के साथ-साथ बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री ने भी चुनावों को झूठा बताया है। उन्होंने कहा कि यह चुनाव पूरी तरह से दिखावटी है और सब कुछ पहले से ही तय था। हसीना ने आगे कहा कि जिस तरह यूनुस ने गैरकानूनी और असंवैधानिक तरीके से सत्ता पर कब्जा किया था उसी तरह से यह चुनाव कराए गए है।
बता दें कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने 299 में से 209 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। यह जीत इसलिए भी अहम है क्योंकि 2008 से 2024 तक शेख हसीना के नेतृत्व में आवामी लीग सत्ता में रही। लगभग दो दशकों बाद सत्ता में वापसी को BNP के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। जमात ए इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन को 70 सीटें मिली हैं। जमात प्रमुख शफीकुर रहमान ने ढाका 15 सीट से जीत दर्ज की। चुनाव परिणामों ने देश में सत्ता संतुलन पूरी तरह बदल दिया है और नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है।
इस जीत के साथ पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे और BNP अध्यक्ष तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। उन्होंने दो सीटों से चुनाव लड़ा और दोनों पर जीत हासिल की। गौरतलब है कि वे पिछले साल दिसंबर में 17 साल बाद देश लौटे थे। बांग्लादेश में 35 साल बाद कोई पुरुष प्रधानमंत्री बनने जा रहा है। इससे पहले 1988 में काजी जफर अहमद प्रधानमंत्री बने थे। 1991 से 2024 तक देश की राजनीति में शेख हसीना और खालिदा जिया का दबदबा रहा और दोनों ही बारी बारी से प्रधानमंत्री बनती रहीं। अब सत्ता की बागडोर नई पीढ़ी के हाथ में जाती दिख रही है।