बांग्लादेश के विदेश मंत्री जल्द ही भारत के आधिकारिक दौरे पर आने वाले है। इस दौरान गंगा जल संधि का नवीनीकरण और ऊर्जा संकट के बीच फ्यूल सप्लाई जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। इस यात्रा से दोनों देशों के संबंधों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक संबंधों में एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। हाल के वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों में कुछ तनाव देखने को मिला था, लेकिन अब सहयोग बढ़ाने की दिशा में प्रयास तेज हो गए हैं। इसी कड़ी में बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान अगले सप्ताह भारत दौरे पर आ रहे हैं, जहां गंगा जल संधि के नवीनीकरण और फ्यूल सप्लाई जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।
भारत और बांग्लादेश के बीच 1996 में हस्ताक्षरित गंगा जल बंटवारा संधि इस वर्ष समाप्त हो रही है, जिसे लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत तेज हो गई है। यह संधि गंगा नदी के जल वितरण को नियंत्रित करती है, जिसमें भारत ऊपरी तटीय देश होने के नाते अहम भूमिका निभाता है। हाल के दिनों में दोनों देशों की तकनीकी टीमों ने हाइड्रोलॉजिकल आकलन किए हैं ताकि नए समझौते की रूपरेखा तैयार की जा सके। जलवायु परिवर्तन का प्रभाव और पश्चिम बंगाल सरकार की सहमति इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण कारक माने जा रहे हैं।
बांग्लादेश इस समय ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है, जिसका मुख्य कारण पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष और होर्मुज स्टेट का बंद होना है। इस स्थिति में ढाका ने भारत से अतिरिक्त डीजल और अन्य फ्यूल सप्लाई की मांग की है। भारत ने संकेत दिया है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखते हुए इस अनुरोध पर विचार करेगा। इस मुद्दे पर पेट्रोलियम मंत्री के साथ संभावित बैठक भी चर्चा में है, जिससे ऊर्जा सहयोग को नई दिशा मिल सकती है।
यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी सरकार के किसी वरिष्ठ नेता की पहली भारत यात्रा है। रहमान संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्षता के लिए 2026-27 कार्यकाल के उम्मीदवार हैं और वे इस चुनाव में भारत का समर्थन भी मांग सकते हैं। उनकी मुलाकात विदेश मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और वाणिज्य मंत्री से प्रस्तावित है, जिससे द्विपक्षीय व्यापार, सुरक्षा और वैश्विक मंचों पर सहयोग को मजबूती मिलने की उम्मीद है।