बांग्लादेश में 12 फरवरी के संसदीय चुनाव से ठीक पहले अल्पसंख्यक समुदायों (हिंदू, बौद्ध, ईसाई) में डर का माहौल गहरा रहा है। बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद ने सरकार और चुनाव आयोग पर आरोप लगाते हुए कहा कि सांप्रदायिक हिंसा के कारण अल्पसंख्यक स्वतंत्र मतदान नहीं कर पा रहे हैं।
बांग्लादेश में 12 फरवरी को संसदीय चुनाव से ठीक पहले अल्पसंख्यक समुदायों में डर और असुरक्षा का माहौल गहराता जा रहा है।
बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता आयोग ने गुरुवार को सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। आयोग ने कहा कि सांप्रदायिक हिंसा के कारण अल्पसंख्यक समुदाय स्वतंत्र तरीके से मतदान करने में असमर्थ है।
27 जनवरी तक देशभर में सांप्रदायिक हिंसा की 42 घटनाएं दर्ज की गई हैं। 11 हत्याएं हुईं, 1 बलात्कार, मंदिरों-चर्चों पर 9 हमले और 21 मामले लूटपाट और घरों पर कब्जे के हैं।
झूठे मामलों में फंसाकर अल्पसंख्यक नेताओं को जेल भेजा जा रहा है। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की इस सबसे बड़ी संस्था ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता को राज्य की मूल नीति से बाहर करने का प्रयास किया जा रहा है। इसे सरकार और चुनाव आयोग का समर्थन मिल रहा है। इससे अल्पसंख्यकों के समान अधिकारों पर खतरा पैदा हो गया है।
बांग्लादेश से भारतीय राजनयिकों के परिवारों को वापस बुलाए जाने को लेकर अंतरिम सरकार ने कहा कि कोई खतरा नहीं है। विदेश मामलों के सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन ने कहा कि परिवारों को वापस बुलाए जाने को लेकर ढाका को कोई औपचारिक जानकारी नहीं मिली है जिसमें इस फैसले से जुड़ी वजह बताई गई हो या खास चिंताओं का जिक्र किया गया हो।
बांग्लादेश में ऐसी कोई स्थिति नहीं है जिससे पता चले कि अधिकारी या उनके परिवार खतरे में हैं। परिवार को वापस बुलाने का कोई कारण नहीं था।