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Bangladesh New Currency Notes: बांग्लादेश में नए नोटों से गायब हुए शेख मुजीबुर रहमान, नई करेंसी में दिखेंगी ये तस्वीरें

Bangladesh new banknotes: आरिफ हुसैन खान ने कहा कि केंद्रीय बैंक के हेडक्वार्टर से नए नोट जारी किए जाएंगे। इसके बाद देश भर में इसके अन्य ऑफिस से भी जारी किए जाएंगे।
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Jun 02, 2025
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बांग्लादेश के केंद्रीय बैंक ने नए नोट किए जारी (Photo-Patrika)

Bangladesh New Currency Notes: बांग्लादेश ने नए बैंक नोट जारी किए हैं, जिनमें देश के संस्थापक राष्ट्रपति शेख मुजीबुर रहमान की तस्वीर को हटा दिया गया है। उनकी जगह नए नोटों में हिंदू और बौद्ध मंदिरों, प्राकृतिक दृश्यों, ऐतिहासिक स्थलों और 1971 के मुक्ति संग्राम के राष्ट्रीय शहीद स्मारक की तस्वीरें शामिल की गई हैं। इनमें दिवंगत चित्रकार जैनुल आबेदीन की कलाकृतियां भी होंगी, जो ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के दौरान बंगाल के अकाल को दर्शाती हैं। बता दें कि शेख मुजीबुर रहमान शेख हसीना के पिता है।

मानव चित्र को नहीं किया जाएगा शामिल

बांग्लादेश बैंक के प्रवक्ता आरिफ हुसैन खान ने कहा कि नई डिज़ाइन में किसी भी मानव चित्र को शामिल नहीं किया जाएगा, बल्कि बांग्लादेश की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक परंपराओं को प्रदर्शित किया जाएगा।  नए नोट 20, 100, 500, और 1000 टका के मूल्यवर्ग में चरणबद्ध तरीके से जारी किए जा रहे हैं। यह फैसला मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के तहत लिया गया है, जिसे शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद सितंबर 2024 में नए नोटों की डिज़ाइन के लिए निर्देश दिए गए थे। 

चरणों में जारी किए जाएंगे नए नोट

आरिफ हुसैन खान ने कहा कि केंद्रीय बैंक के हेडक्वार्टर से नए नोट जारी किए जाएंगे। इसके बाद देश भर में इसके अन्य ऑफिस से भी जारी किए जाएंगे। नए डिजाइन वाले अलग-अलग नोट चरणों में जारी किए जाएंगे। बता दें कि 1971 में बांग्लादेश बनने के बाद से अब तक पांच नोटों के डिजाइन में बदलाव किया है।

शेख मुजीबुर की विरासत को कमजोर करने के लिए उठाया कदम

बता दें कि यह बदलाव 2024 में शेख हसीना के सत्ता से हटने और जुलाई के छात्र आंदोलन के बाद हुआ है, जिसने उनकी सरकार को उखाड़ फेंका था। आलोचकों का मानना है कि यह कदम शेख मुजीबुर रहमान की विरासत को कमज़ोर करने की कोशिश हो सकता है।

कौन हैं शेख मुजीबुर रहमान

शेख मुजीबुर रहमान (17 मार्च 1920 - 15 अगस्त 1975) बांग्लादेश के संस्थापक राष्ट्रपति थे, जिन्हें "बंगबंधु" (बंगाल का मित्र) के नाम से जाना जाता है। वे बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेता थे और 1971 में पाकिस्तान से बांग्लादेश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।