
भारत के चिनाब का पानी रोकने से पाकिस्तान में जल संकट गहरा गया है। (सांकेतिक फोटो: ANI )
Indus Water Crisis Pakistan: कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पाकिस्तान के पंजाब क्षेत्र में चिनाब नदी का पानी भारत(India Pakistan water dispute) की ओर से रोक देने के कारण जल संकट (Indus water crisis)गहराता जा रहा है। मंगला और तरबेला जैसे मुख्य बांध (Mangal Tarbela dams) सूखे पड़े हुए हैं, जिससे सिंचाई प्रभावित हो रही है और खरीफ की फसलों की बुआई रुकने का खतरा मंडरा रहा है। दरअसल चिनाब नदी में भारत की ओर से जल प्रवाह घटाने के बाद पाकिस्तान के सिंधु नदी प्रणाली में पानी की कमी ((Pakistan water shortage))पिछले साल की तुलना में तेजी से बढ़ रही है । हालत यह है कि मंगला और तरबेला बांधों में जल संग्रहण आधे से भी कम हो गया है, जिससे सिंचाई और जल विद्युत उत्पादन दोनों प्रभावित हो रहे हैं। मानसून देर से आने के कारण सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता और भी कम हो सकती है, जिससे पंजाब प्रांत के किसानों को भारी नुकसान होने की आशंका है।
ध्यान रहे कि भारत ने हाल ही में 1960 की सिंधु जल संधि निलंबित की है और पाकिस्तान को जलस्तर के आंकड़े देना भी बंद कर दिया गया है, जिससे पाकिस्तान को मानसून के दौरान पहले की तरह पूर्व चेतावनी देने में दिक्कत हो रही है। इस कदम से पाकिस्तानी किसानों के लिए खासकर खरीफ की बुवाई के मौसम में जल संकट और भी गहरा गया है।
पाकिस्तान में इस गर्मी में भीषण तापमान के बीच मानसून देर से पहुंचने की वजह से सिंचाई की समस्या और बढ़ गई है। जून के अंत तक मानसून के पहुंचने की संभावना कम है, जिससे किसानों को सिंचाई के लिए पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ सकता है।
पाकिस्तान के सिंधु नदी प्रणाली प्राधिकरण ने बताया कि 2 जून, 2025 को पंजाब प्रांत में पानी की उपलब्धता पिछले साल की तुलना में 10.3 प्रतिशत कम हो गई है। वहीं कुल पानी की मात्रा 1,28,800 क्यूसेक रह गई है, जो सिंचाई के लिए पर्याप्त नहीं है।
पाकिस्तान के प्रमुख दो बांध, मंगला और तरबेला, जो सिंधु और झेलम नदियों पर बने हुए हैं, आधी क्षमता से भी कम पानी स्टोर कर पा रहे हैं। यह स्थिति जलविद्युत उत्पादन और सिंचाई दोनों को प्रभावित कर रही है, जिससे पंजाब और सिंध प्रांतों में खेती संकट में है।
भारत की ओर से 1960 की सिंधु जल संधि निलंबित करने के बाद से पाकिस्तान को सिंधु नदी प्रणाली के जल प्रवाह में भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। इस निर्णय के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ नदियों के जलस्तर का डाटा साझा करना भी बंद कर दिया है, जिससे मानसून के दौरान पूर्व चेतावनी और आपदा प्रबंधन में बाधा आई है।
पाकिस्तान सरकार ने इस स्थिति को देश के लिए "गंभीर जल संकट" बताया है और भारत के सिंधु जल संधि निलंबन के फैसले की कड़ी निंदा की है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाते हुए जल संकट को आतंकवाद के साथ जोड़कर भारत की नीतियों की आलोचना की है। वहीं, कृषि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर जल संकट इसी तरह बना रहा तो आने वाले महीनों में पाकिस्तान के खाद्य सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है।
पाकिस्तान सरकार अब सिंधु जल संकट को कम करने के लिए वैकल्पिक जल स्रोत खोजने और जल संरक्षण परियोजनाओं को तेज करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। सिंधु जल प्राधिकरण की ओर से आगामी हफ्तों में नए जल प्रबंधन उपायों की घोषणा की जा सकती है। साथ ही, दक्षिण-पश्चिम मानसून की संभावित स्थिति पर पैनी नजर रखी जा रही है ताकि किसानों को समय पर सहायता दी जा सके।
इस जल संकट ने पाकिस्तान के सामाजिक और आर्थिक तनाव और भी बढ़ावा दिया है। सिंध की कमी के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति खराब हो रही है, जिससे ग्रामीण इलाकों में रोजगार संकट और पलायन बढ़ सकता है। इसके अलावा, भारत-पाकिस्तान के बीच जल स्रोतों को लेकर राजनीतिक तनाव बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है, जो क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित कर सकता है।
Published on:
02 Jun 2025 07:16 pm
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