बांग्लादेश में जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के 505 मामले दर्ज हुए हैं। रिपोर्ट में हिंदुओं पर हमले, मंदिरों में तोडफोड, हत्या, अपहरण और महिलाओं के खिलाफ अपराधों को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है।
बांग्लादेश में नई अंतरिम सरकार बनने के बाद भी अल्पसंख्यक समुदायों की स्थिति में सुधार नहीं दिख रहा है। खासकर हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा, धमकी और धार्मिक हमलों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इसी बीच एक मानवाधिकार संगठन की नई रिपोर्ट ने स्थिति को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से अप्रैल 2026 तक देशभर में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के 505 मामले दर्ज किए गए हैं। इन घटनाओं में हत्या, अपहरण, मंदिरों पर हमले, महिलाओं के खिलाफ अपराध और जमीन कब्जाने जैसे मामले शामिल हैं। रिपोर्ट सामने आने के बाद बांग्लादेश सरकार की कानून व्यवस्था और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं।
मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स कांग्रेस फॉर बांग्लादेश माइनॉरिटीज (HRCBM) ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि ये 505 घटनाएं बांग्लादेश के 62 जिलों और सभी 8 प्रशासनिक डिवीजनों में दर्ज की गईं। रिपोर्ट में कहा गया कि यह कोई अलग-अलग घटनाएं नहीं हैं, बल्कि अल्पसंख्यकों के खिलाफ लगातार जारी हिंसा का हिस्सा हैं। आंकड़ों के अनुसार 144 मामले अपहरण और शारीरिक हमले से जुड़े थे, जबकि 132 मामलों में जमीन कब्जाना, आगजनी और लूटपाट शामिल रही। इसके अलावा 100 मामलों में हत्या या संदिग्ध मौत की जानकारी दी गई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कई पीडितों को न्याय नहीं मिल पा रहा है और जांच प्रक्रिया भी कमजोर बनी हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार इस अवधि में 95 मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर हमले हुए। वहीं महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा के 28 मामले सामने आए, जिनमें दुष्कर्म और सामूहिक दुष्कर्म जैसे अपराध शामिल हैं। संगठन ने कहा, दर्ज घटनाएं यह दिखाती हैं कि अल्पसंख्यकों को सुरक्षा, जवाबदेही और न्याय तक समान पहुंच देने में लगातार विफलता बनी हुई है। रिपोर्ट में पीडित परिवारों को धमकाने, मामलों को दबाने और प्रशासनिक उदासीनता पर भी चिंता जताई गई। इससे पहले अप्रैल में बांग्लादेश हिंदू बौद्ध क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल ने भी देश में सांप्रदायिक हिंसा के 133 मामलों का दावा किया था। संगठन ने कहा था कि चुनाव से पहले और बाद में हिंसा की घटनाओं में तेजी आई है।
बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बाद बनी नई सरकार से अल्पसंख्यकों को सुरक्षा मिलने की उम्मीद थी, लेकिन हालात अब भी चिंताजनक बने हुए हैं। लगातार बढ़ती हिंसा ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक समूहों की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट में कहा गया कि अगर प्रशासन ने समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए तो सामाजिक तनाव और बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करना नई सरकार की सबसे बड़ी परीक्षा बनता जा रहा है।