
पीएम मोदी – हेले लिंग (Photo X)
Helle Lyng-PM Modi Controversy: ओस्लो में पीएम मोदी से तीखे सवाल पूछने वाली नॉर्वेजियन पत्रकार हेले लिंग सोशल मीडिया पर ट्रोल होने के बाद उन्होंने कहा कि 'यह सिर्फ एक सवाल था, मैं कोई विदेशी जासूस नहीं हूं।' उन्होंने अखबार में लिखा कि रविवार को संविधान दिवस मनाकर वह सोमवार को प्रेस की आजादी का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हट सकतीं। भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में जब दोनों देशों के पीएम बिना सवाल लिए जाने लगे, तब हेले ने मोदी को टोकते हुए पूछा था कि वह दुनिया की सबसे आजाद प्रेस से भाग क्यों रहे हैं? इस मुद्दे पर भारतीय विदेश मंत्रालय के सचिव सिबी जॉर्ज से भी उनकी तीखी नोकझोंक हुई। अब इस मामले पर भारत में भी सियासत गरमा गई है, जहां राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर निशाना साधा है, वहीं बीजेपी ने पत्रकार के रवैए को 'उद्दंड प्रलाप' करार दिया है।
सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग और आलोचनाओं का सामना कर रहीं हेले लिंग ने अपनी इस आक्रामक पत्रकारिता का खुलकर बचाव किया है। उन्होंने अपने लेख में लिखा 'मैं नॉर्वे का संविधान दिवस रविवार को सिर्फ इसलिए नहीं मनाता कि सोमवार को मैं अपनी प्रेस की आजादी का इस्तेमाल करने से परहेज करूं।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब पीएम मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर एक संयुक्त प्रेस उपस्थिति के बाद बिना किसी मीडिया सवाल का जवाब दिए बाहर निकलने लगे। इसी दौरान हेले लिंग ने पीछे से आवाज लगाते हुए पीएम मोदी से पूछा कि वह दुनिया की सबसे आजाद प्रेस से सवाल क्यों नहीं ले रहे हैं? वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में नॉर्वे के नंबर वन होने और भारत की निचली रैंकिंग का हवाला देते हुए हेले ने कहा, 'यह हमारा काम है कि हम उन ताकतों से सवाल करें जिनके साथ हम सहयोग करते हैं।'
हेले लिंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा किया। जिसमें उन्होंने अपनी सफाई में कहा 'पत्रकारिता कभी-कभी टकराव वाली होती है। हम जवाब चाहते हैं। अगर कोई इंटरव्यू देने वाला व्यक्ति खासकर जिसके पास सत्ता हो, मेरे पूछे गए सवाल का जवाब नहीं देता, तो मैं बीच में टोककर उससे ज्यादा सटीक जवाब पाने की कोशिश करूंगी। यही मेरा काम और मेरा फर्ज है। इसके साथ ही उन्होंने खुद पर लग रहे विदेशी जासूस होने के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, 'मैं किसी भी तरह की विदेशी जासूस नहीं हूं।'
ओस्लो में आयोजित भारतीय विदेश मंत्रालय की एक प्रेस ब्रीफिंग में हेले लिंग और विदेश मंत्रालय के सचिव सिबी जॉर्ज के बीच सीधी भिड़ंत हो गई। हेले ने भारत में मानवाधिकारों की स्थिति पर सवाल उठाते हुए पूछा कि पत्रकार भारत सरकार पर क्यों 'भरोसा' करें? इस पर सिबी जॉर्ज ने भारत के लोकतांत्रिक ढांचे, संविधान, स्वतंत्र न्यायपालिका और कोविड वैक्सीन डिप्लोमेसी का हवाला देते हुए लंबा जवाब दिया। जब हेले ने उन्हें बीच में टोककर 'विशिष्ट जवाब' मांगा, तो सिबी जॉर्ज भड़क गए और उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि 'कृपया मुझे बीच में मत टोकिए। आप सवाल पूछिए, लेकिन मुझसे यह मत कहिए कि मैं उसका जवाब किसी खास तरीके से दूं।'
इस अंतरराष्ट्रीय विवाद की एंट्री अब भारतीय राजनीति में भी हो चुकी है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इस घटना को लेकर पीएम मोदी पर सीधा हमला बोला और कहा कि 'जब छिपाने के लिए कुछ नहीं होता, तो डरने के लिए भी कुछ नहीं होता।' वहीं दूसरी ओर, बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने प्रधानमंत्री का पुरजोर बचाव किया। मालवीय ने तर्क दिया कि संयुक्त उपस्थिति के दौरान नॉर्वे के पीएम ने भी कोई सवाल नहीं लिया था। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विरोधी 'एक उद्दंड पत्रकार के असंगत प्रलाप' को हवा दे रहे हैं। इसके जवाब में हेले ने स्पष्ट किया कि नॉर्वेजियन प्रधानमंत्री ने बाद में भारतीय मीडिया दल सहित पत्रकारों से अलग से बातचीत की थी।
Published on:
21 May 2026 03:18 pm
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