
Bernie Sanders AI Warning: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वैश्विक दौड़ अब सिर्फ तकनीकी प्रतिस्पर्धा का मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि मानव सुरक्षा और भविष्य को लेकर गंभीर बहस बनती जा रही है। अमेरिकी सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने इसी चिंता को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बड़ा कदम उठाने की अपील की है। उनका कहना है कि दुनिया को एआई की रफ्तार केवल कम नहीं करनी चाहिए, बल्कि अत्याधुनिक विकास पर अस्थायी रोक और ऐसी सुपरइंटेलिजेंस पर प्रतिबंध की दिशा में बढ़ना चाहिए, जिसे इंसान नियंत्रित न कर सकें।
अमेरिकी सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने एआई को लेकर जारी वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अब धीमी रफ्तार से आगे बढ़कर पूरी तरह ब्रेक लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर अत्यधिक शक्तिशाली एआई सिस्टम इंसानी नियंत्रण से बाहर हो गए तो उसके परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं। सैंडर्स चाहते हैं कि ट्रंप और शी जिनपिंग आगामी एआई शिखर बैठक में इस विषय पर अंतरराष्ट्रीय समझौते की पहल करें।
सैंडर्स की यह मांग ऐसे समय आई है, जब एआई उद्योग के प्रमुख चेहरों ने भी सुरक्षा उपायों को लेकर चिंता जाहिर की है। एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोडेई ने एआई के विकास की गति को नियंत्रित करने की वकालत की है। उनके मुताबिक अतिरिक्त एक-दो साल का समय सुरक्षा और एआई-अलाइनमेंट की व्यवस्था मजबूत करने में बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
अमोडेई ने तीन स्तरीय योजना की बात कही है। इसमें स्वतंत्र विशेषज्ञों को एआई सिस्टम की सुरक्षा व्यवस्था की जांच करने और मॉडल के व्यवहार का आकलन करने की अधिक स्थायी पहुंच देने जैसे कदम शामिल हैं। OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने भी अमोडेई की कुछ सुरक्षा पहलों के समर्थन के संकेत दिए हैं। एलन मस्क ने भी अमोडेई की चेतावनी से सहमति जताई है।
मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि अमोडेई ने आशंका जताई है कि आने वाले 6 से 12 महीनों में एआई इतने सक्षम एजेंटों का समूह तैयार कर सकता है, जो इंटरनेट पर बड़े पैमाने पर स्वायत्त तरीके से काम करने में सक्षम हों।
ऑल्टमैन ने भी एआई सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए कहा है कि यदि इस दशक के अंत तक एआई से मानव अस्तित्व पर गंभीर खतरा पैदा होने की 10 प्रतिशत संभावना भी हो, तो यह जोखिम स्वीकार्य नहीं माना जा सकता।
इसी बीच एआई शोधकर्ता जैकब कॉक्सन के उद्योग छोड़ने की खबर ने बहस को और तेज कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया था कि कंपनियां ऐसे सिस्टम बनाने की होड़ में हैं, जिन्हें भविष्य में नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है।
सैंडर्स का प्रस्ताव इसी बढ़ती चिंता को राजनीतिक रूप देने की कोशिश है। हालांकि अमेरिका और चीन के बीच एआई वर्चस्व की प्रतिस्पर्धा में ऐसा समझौता कितना व्यावहारिक होगा, यह बड़ा सवाल बना हुआ है। तकनीक के समर्थक जहां इसे आर्थिक और वैज्ञानिक प्रगति का अगला इंजन मानते हैं, वहीं सुरक्षा विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि क्षमता बढ़ने की रफ्तार के साथ नियंत्रण की व्यवस्था भी उतनी ही तेजी से मजबूत होनी चाहिए।