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भारत से साइबेरिया, मंगोलिया और सेंट्रल एशिया के ठंडे इलाकों में लौट रहे पक्षी

भारत के कई राज्यों से अब पक्षी साइबेरिया, मंगोलिया और सेंट्रल एशिया के ठंडे इलाकों में लौट रहे हैं। क्या है इसकी वजह? आइए जानते हैं।
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May 12, 2026
Amur Falcon
Amur Falcon

मई की तपती गर्मी के साथ ही भारत के जलाशयों से एक खामोश विदाई का सिलसिला पूरा हो रहा है। राजस्थान की झीलें, गुजरात के कच्छ और दक्षिण भारत के तटीय इलाकों से वो पक्षी विदा हो गए हैं या हो रहे हैं, जो सर्दियों में हमारे मेहमान थे। बिना किसी नक्शे, जीपीएस या बॉर्डर-पासपोर्ट अब ये परिंदे हिमालय पार कर साइबेरिया, मंगोलिया और सेंट्रल एशिया के उन ठंडे इलाकों की ओर लौट रहे हैं, जहां गर्मियों में उनका प्रजनन मौसम शुरू होता है। उनके लिए आसमान में एक ऐसा अदृश्य राजमार्ग मौजूद है, जिसे दुनिया 'सेंट्रल एशियन फ्लायवे' के नाम से जानती है। कई पक्षी इन दिनों हिमालय पार कर तिब्बत, मंगोलिया और साइबेरिया की ओर लौट रहे हैं। अब मुख्य गतिविधि हिमालयी कॉरिडोर और ऊंचाई वाले स्टॉपओवर क्षेत्रों में दिखाई देती है।

क्या है सेंट्रल एशियन फ्लाईवे?

इंसानों द्वारा सड़कें और नेविगेशन सिस्टम बनाने से बहुत पहले प्रकृति ने आसमान में यह एक विशाल हवाई मार्ग तैयार कर दिया था। यह दुनिया के आठ प्रमुख प्रवासी मार्गों में से एक है। यह आर्कटिक महासागर से शुरू होकर हिमालय की चोटियों को पार करता हुआ भारतीय उपमहाद्वीप तक फैला है। भारत इस मार्ग का मुख्य 'विंटर होम' है। यहाँ की आर्द्रभूमियाँ इन थके हुए यात्रियों को भोजन और सुरक्षा देती हैं।

आसमान के 'सुपर एथलीट्स'

बार-हेडेड गूज़ दुनिया के सबसे ऊंचे उड़ने वाले पक्षी हैं, जो 7,000 मीटर से ज़्यादा की ऊंचाई पर हिमालय को पार करते हुए अपना सफर करते हैं। डेमोइसेल क्रेन (कुरजां) अपनी सुंदरता के लिए मशहूर पक्षी होते हैं जो यूरेशिया से हज़ारों किलोमीटर का सफर तय कर राजस्थान और तमिलनाडु तक पहुंचते हैं। अमूर फाल्कन छोटे शिकारी पक्षी होते हैं जो अपनी नॉन-स्टॉप अंतरमहाद्वीपीय उड़ानों से हैरान कर देते हैं। इस साल 'अपपांग', 'अलंग' और 'अहु' ने वैज्ञानिकों को चौंकाया है।

कैसे खोजते हैं रास्ता?

पक्षियों की आंखों और चोंच में 'मैग्नेटोरेसेप्टर्स' होते हैं। यह एक आंतरिक कंपास की तरह काम करता है जो उन्हें पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को महसूस करने में मदद करता है। इसके अलावा वो सूरज, तारों और पहाड़ों जैसे भौगोलिक चिह्नों का सहारा लेते हैं। लंबी उड़ान के संघर्ष के अलावा जलवायु परिवर्तन, सूखती झीलें, प्रदूषण और बिजली के तार इनके लिए सबसे बड़े खतरे हैं।

Updated on:
12 May 2026 06:40 am
Published on:
12 May 2026 06:38 am