चीन ने ब्रिटेन और कनाडा के आम पासपोर्ट धारकों के लिए बड़ा वीजा नियम बदलाव किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने रविवार को घोषणा की कि 17 फरवरी से इन दोनों देशों के नागरिकों के लिए वीजा-फ्री नीति बढ़ाई जाएगी, जिससे बॉर्डर पार यात्रा आसान होगी।
चीन ने दो देशों के लिए बड़ा ऐलान कर दिया है। नई घोषणा से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को तकलीफ पहुंच सकती है। दरअसल, चीन ने ब्रिटेन और कनाडा के लोगों के लिए अपने वीजा के नियमों में बड़ा बदलाव किया है।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने रविवार को कहा कि बॉर्डर पार यात्रा को और आसान बनाने के लिए 17 फरवरी से कनाडा और ब्रिटेन के आम पासपोर्ट होल्डर्स के लिए अपनी वीजा फ्री नीति बढ़ाने का फैसला किया है।
न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि दोनों देशों के आम पासपोर्ट होल्डर्स को बिजनेस, टूरिज्म, परिवार/दोस्तों से मिलने, एक्सचेंज और ट्रांजिट के मकसद से चीन में आने और 30 दिनों तक रहने के लिए वीजा से छूट दी जा सकती है।
विदेश मंत्रालय ने आगे बताया कि यह नीति 31 दिसंबर, 2026 तक लागू रहेगी। बता दें कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की ट्रंप से गहरी दोस्ती है। चीन ने इस बड़ी घोषणा से ब्रिटेन को अपने करीब लाने की कोशिश की है। जिससे ट्रंप को झटका लग सकता है।
वहीं, कनाडा को ट्रंप कई बार चीन से दूरी बनाकर रहने की हिदायत दे चुके हैं। वह खुलकर कह चुके हैं कि अगर कनाडा चीन के साथ कोई भी समझौता करता है तो अंजाम भुगतना पड़ेगा। इस बीच, कनाडा के लिए चीन की यह घोषणा ट्रंप को एक्शन लेने पर मजबूर कर सकती है।
बता दें कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और कनाडाई समकक्ष मार्क कार्नी ने जनवरी में बीजिंग का दौरा किया था। उनका मकसद चीन के साथ संबंधों को मजबूत करना और अमेरिका के लगातार बदलते हालात से अलग हटना था।
दोनों नेताओं की राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के बाद ही चीन की तरफ से यह बड़ा फैसला सामने आया है। बदलते ग्लोबल ऑर्डर के बीच यह फैसला मायने रखता है।
दोनों नेताओं ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग जैसे चीन के बड़े नेताओं के साथ मीटिंग के बाद हुई तरक्की की सराहना की थी, जिसमें उनके नागरिकों के लिए चीन में वीजा-फ्री एक्सेस जैसे मुद्दे भी शामिल थे।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर जब चीन के दौरे पर पहुंचे थे, तो उन्हें और उनकी टीम को बर्नर फोन और नए सिम कार्ड दिए गए। एक रिपोर्ट में कहा गया कि वे डिवाइस में स्पाइवेयर लोड होने या ब्रिटिश सरकार के सर्वर को हैक होने से रोकने के लिए टेम्पररी ईमेल एड्रेस का भी इस्तेमाल कर रहे हैं।