China AI tool in Tibet: तिब्बत की आवाज को दबाने के लिए चीन ने खतरनाक पैतरा आजमाया है। चीन ने तिब्बत में AI टूल DeepZang लॉन्च किया है, जो लोगों की सोच और भाषा को बदल रहा है।
चीन अब तिब्बत की आवाज को दबाने के लिए नया पैतरा आजमा रहा है। वह खतरनाक एआई टूल के जरिए तिब्बत की संस्कृति को मिटाने की कोशिश में जुटा है। तिब्बत में मार्च के समय एक एआई टूल 'DeepZang' को लॉन्च किया गया था।
इस प्लेटफॉर्म का मकसद सिर्फ जानकारी देना नहीं, बल्कि तिब्बत के लोगों की सोच को पूरी तरह अपने हिसाब से ढालना है। सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, ये टूल तिब्बत में बीजिंग की कहानी को रोजमर्रा की जिंदगी में घोलने का काम कर रहा है।
ये एआई प्लेटफॉर्म तिब्बती भाषा में काम करता है, जिससे लगता है कि ये स्थानीय लोगों की मदद के लिए बनाया गया है। लेकिन असल में ये बीजिंग की भाषा और विचारों को आगे बढ़ाता है। उदाहरण के लिए, इसमें ‘तिब्बत’ शब्द की जगह हमेशा ‘शिजांग’ इस्तेमाल होता है।
धीरे-धीरे ये शब्द लोगों की जुबान और दिमाग पर छा जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, DeepZang पुरानी सेंसरशिप से आगे निकल गया है। पहले तो सिर्फ खबरें रोक दी जाती थीं, लेकिन अब ये खुद पूरी कहानी लिखता है।
कोई सवाल पूछो तो ये बीजिंग के हिसाब से जवाब, सारांश और व्याख्या तैयार कर देता है। अलग-अलग विचारों की जगह एक ही सरकारी नजरिया लोगों तक पहुंचता है।
सूत्र बताते हैं कि आने वाले समय में ये टूल स्कूलों, सरकारी सेवाओं और आम डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में गहराई से शामिल किया जा सकता है। धर्म और शासन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सिर्फ चीनी सरकार की बात ही लोगों तक पहुंचे, यही मकसद दिखता है।
तिब्बत पर चीन का नियंत्रण नया नहीं है। पहले प्रशासन, निगरानी और सख्त नीतियों से काम लिया जाता था। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को इस काम में लगाया जा रहा है। ग्रीस सिटी टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि DeepZang पारंपरिक सूचना नियंत्रण को AI युग में ले आया है।
दूसरी ओर, यूरोपियन टाइम्स की एक रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर लिथियम निकालने का जिक्र है। 2025 से चीन इस क्षेत्र में तेजी से उत्पादन बढ़ा रहा है। लेकिन फायदा तिब्बत को कम, मुख्य भूमि चीन को ज्यादा मिल रहा है। स्थानीय लोग कहते हैं कि ये उनके संसाधनों का शोषण है और उनकी संस्कृति को चुपचाप खत्म कर रहा है।
विशेषज्ञ चिंता जता रहे हैं कि अगर DeepZang जैसे टूल्स को पूरी तरह लागू कर दिया गया तो तिब्बती संस्कृति, भाषा और इतिहास को नया रूप दिया जा सकेगा। युवा पीढ़ी सरकारी नजरिए से ही सब कुछ समझने लगेगी। अलग-अलग सोर्स से जानकारी लेने की जगह एक ही AI जनरेटेड जवाब उन्हें मिलेगा।