
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग। (फोटो- ANI)
भारत का पड़ोसी नेपाल इन दिनों एक अजीब दबाव में है। एक तरफ चीन है जो हर छोटी बात पर नजर रख रहा है और आपत्ति जता रहा है। दूसरी तरफ नेपाल की अपनी संप्रभुता है जिसे वो बचाना चाहता है।
हाल ही में चीनी राजदूत झांग माओमिंग ने नेपाल के गृह मंत्री सुदान गुरुंग से मुलाकात की। यह कोई सामान्य शिष्टाचार भेंट नहीं थी। इस बैठक में चीन ने साफ कहा कि नेपाल तिब्बत और ताइवान से जुड़ी गतिविधियों पर और सख्त हो।
चीन की सबसे बड़ी चिंता अभी यह है कि धर्मशाला में 27 मई को केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के अध्यक्ष पेनपा त्सेरिंग का शपथ समारोह होने वाला है। चीनी राजदूत को डर है कि नेपाल को इस कार्यक्रम में बुलाया जा सकता है।
राजदूत ने गृह मंत्री को सीधे कहा कि नेपाल इस तरह के किसी भी तिब्बती राजनीतिक आयोजन से दूर रहे। यह चेतावनी बताती है कि बीजिंग कितना सतर्क है और नेपाल की हर हरकत पर उसकी नजर है।
चीन की परेशानी सिर्फ शपथ समारोह तक नहीं है। कुछ और बातें भी हैं जो बीजिंग को चुभ रही हैं। नेपाल की राजधानी काठमांडू में ताइवान के प्रतीक चिह्न दिखाई दिए। तिब्बती नेतृत्व ने नेपाल के एक नेता बालेंद्र शाह को बधाई संदेश भेजा। 1
4वें दलाई लामा के प्रतिनिधियों ने नेपाल का दौरा किया। चीन इन सब बातों को अपने खिलाफ एक सोची-समझी साज़िश के रूप में देखता है। बीजिंग की नजर में यह सब चीन विरोधी गतिविधियां हैं।
नेपाल ने चीन को साफ कर दिया कि वो वन चाइना नीति का सम्मान करता है। गृह मंत्री गुरुंग ने कहा कि नेपाल अपनी ज़मीन का इस्तेमाल किसी भी पड़ोसी देश के खिलाफ नहीं होने देगा।
लेकिन साथ ही यह भी कहा कि नेपाल किसी बाहरी ताकत का औज़ार नहीं बनेगा। अपनी संप्रभुता और स्वतंत्र फैसले लेने के अधिकार पर वो कोई समझौता नहीं करेगा।
चीनी राजदूत ने एक और इशारा किया जो बेहद दिलचस्प है। उन्होंने कहा कि कुछ "तीसरे देश" नेपाल के अंदरूनी मामलों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। यह चीन को घेरने की रणनीति का हिस्सा है।
यहां 'तीसरे देश' से इशारा किसकी तरफ है यह सब जानते हैं। भारत और अमेरिका दोनों नेपाल में अपना प्रभाव बनाए रखना चाहते हैं।
नेपाल ने इस पर भी संतुलित जवाब दिया और कहा कि उसकी विदेश नीति तटस्थ है और सभी देशों के साथ संतुलित रिश्ते रखना उसकी प्राथमिकता है।
यह पूरा घटनाक्रम भारत की नजर से भी बेहद अहम है। धर्मशाला हिमाचल प्रदेश में है और वहीं तिब्बती प्रशासन का मुख्यालय है।
चीन नेपाल पर दबाव डाल रहा है तो परोक्ष रूप से भारत की तिब्बत नीति पर भी निशाना साध रहा है। नेपाल अगर चीन के दबाव में पूरी तरह झुक गया तो यह भारत के लिए रणनीतिक नुकसान होगा।
Updated on:
16 Apr 2026 09:04 pm
Published on:
16 Apr 2026 09:04 pm
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