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मच्छरों का खात्मा करेंगे ‘विशेष’ मच्छर: गूगल करेगी अमेरिका इतिहास का सबसे बड़ा प्रयोग

US mosquito experiment: मच्छरों से छुटकारा पाने के लिए अमेरिका में इतिहास का सबसे बड़ा प्रयोग प्रस्तावित है। वोल्बाचिया बैक्टीरिया से संक्रमित करोड़ों नर मच्छरों के जरिए डेंगू और अन्य बीमारियों पर लगाम लगाने की कोशिश होगी।

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Google Wolbachia mosquitoes project.

अमेरिका में मच्छरों की आबादी घटाने और डेंगू जैसी बीमारियों पर नियंत्रण के लिए 3.2 करोड़ वोल्बाचिया-संक्रमित विशेष मच्छरों को छोड़ने की तैयारी है। (Photo- IANS)

Wolbachia mosquitoes: मच्छरों से छुटकारा पाने के लिए करोड़ों नए मच्छर छोड़ने का विचार पहली नजर में अजीब लग सकता है, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि यही रणनीति भविष्य में डेंगू और अन्य मच्छरजनित बीमारियों के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार बन सकती है। इस संबंध में गूगल की सहयोगी कंपनी अब अमेरिका में इतिहास का सबसे बड़ा मच्छर-नियंत्रण प्रयोग करने की तैयारी में है। इस योजना के तहत अमेरिका के फ्लोरिडा और कैलिफोर्निया के कुछ इलाकों में करीब 3.2 करोड़ विशेष रूप से उपचारित मच्छरों को छोड़ा जा सकता है।

जनता की राय के बाद फैसला

मच्छरों से छुटकारा पाने के लिए अमेरिका में इस प्रस्ताव पर 5 जून 2026 तक सार्वजनिक सुझाव मांगे गए हैं। इसके बाद नियामक एजेंसियां यह तय करेंगी कि इस महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दी जाए या नहीं।

‘वोल्बाचिया’ बैक्टीरिया का कमाल

बता दें कि यह तकनीक ‘वोल्बाचिया’ नामक प्राकृतिक बैक्टीरिया पर आधारित है। यह तितलियों, पतंगों और कई अन्य कीटों में स्वाभाविक रूप से पाया जाता है और इंसानों या जानवरों के लिए हानिकारक नहीं माना जाता। वोल्बाचिया से संक्रमित नर मच्छरों को जब खुले वातावरण में छोड़ा जाता है, तो वे मादा मच्छरों के साथ प्रजनन तो करते हैं, लेकिन उनके अंडों से मच्छर नहीं पैदा होते। ऐसे में समय के साथ मच्छरों की आबादी तेजी से घटने लगती है।

परीक्षणों में मिले अच्छे नतीजे

कैलिफोर्निया की सेंट्रल वैली में किए गए शुरुआती परीक्षणों में मच्छरों की संख्या में 95 प्रतिशत से अधिक कमी दर्ज की गई। कुछ क्षेत्रों में तो मच्छर लगभग गायब हो गए। वहीं, सिंगापुर ने डेंगू नियंत्रण के लिए इसी तकनीक का बड़े पैमाने पर उपयोग किया, जहां प्रभावित इलाकों में डेंगू के मामलों में करीब 70 प्रतिशत तक गिरावट देखी गई।

भारत भी कर रहा आकलन

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और वेक्टर कंट्रोल रिसर्च सेंटर (वीसीआरसी) ने पुडुचेरी में वोल्बाचिया संक्रमित मच्छरों पर शुरुआती शोध और प्रयोगशाला परीक्षण किए हैं। हालांकि, सरकार अभी इस तकनीक को बड़े पैमाने पर लागू करने से पहले इसके दीर्घकालिक प्रभावों और पर्यावरणीय सुरक्षा का मूल्यांकन कर रही है। यदि इस परीक्षण से पर्यावरण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता तो भारत के लिए यह अच्छी खबर होगी।