Economy Crisis In China: चीन की अर्थव्यवस्था मुश्किल में है। देश के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने खुद इस बात को माना है।
2023 चीन की अर्थव्यवस्था के लिए कुछ खास नहीं था। और अब 2024 भी चीन के लिए भारी आर्थिक चुनौतियों के बीच शुरू हुआ है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नए साल के अपने संबोधन में पहली बार माना है कि देश आर्थिक संकट से गुजर रहा है। जिनपिंग ने कहा कि चीन के कारोबारी मुश्किल हालात से गुजर रहे हैं और युवाओं के लिए नौकरी ढूंढना मुश्किल हो गया है। साथ ही जिनपिंग ने कहा कि देश 2023 में तूफानी दौर से निकल चुका है और 2024 में अब अर्थव्यवस्था में रिकवरी देखने को मिलेगी। राष्ट्रपति की ये स्वीकृति ऐसे समय में आई है जबकि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था कमजोर मांग के चलते संरचनागत मंदी, बढ़ती बेरोजगारी के दौर से गुज़र रही है।
दिसंबर में फैक्ट्रियों में कम हुआ काम
जिनपिंग के संबोधन से कुछ ही घंटे पहले चीन के नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टेटिस्टिक्स ने दिसंबर माह की पीएमआइ (परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स) के जो आंकड़े जारी किए वो बता रहे हैं कि दिसंबर में चीन की फैक्ट्रियों में कम काम हुआ है। यह इंडेक्स दिसंबर में 49.0 रहा, जबकि नवंबर में यह 49.4 था।
बढ़ रही है युवा बेरोजगारी
चीन में युवा बेरोजगारी भी बढ़ रही है। देश के युवाओं के लिए नौकरी ढूंढना मुश्किल हो गया है। चीन में युवा बेरोजगारी इतनी बढ़ गई है कि सरकार ने अब इसके आंकड़े जारी करना भी बंद कर दिया है। देश में स्थिति ऐसी है कि कई युवा तो नौकरी न मिलने की वजह से गुस्से में अपनी डिग्री भी जला रहे हैं।
राजनीतिक हस्तक्षेप से भयावह हुआ आर्थिक संकट
चीन में आर्थिक आंकड़े 2023 में पूरे साल परेशान करने वाले रहे हैं और इसमें कोई सुधार नहीं हो रहा है। विदेशी निवेश में गिरावट आई है और पूंजी का बाहर जाना तेज़ी से बढ़ा है। चीन में आर्थिक संकट का एक मुख्य कारण यह है कि जिनपिंग के शासन में सत्ता पर नियंत्रण रखने के लिए पिछले तीन सालों में प्राइवेट सेक्टर के कुछ हिस्सों पर लगातार सरकारी कार्रवाई की गई, जिससे प्रोग्रामिंग से लेकर स्कूल ट्यूशन तक कई सेक्टर्स में नौकरियाँ चली गई। एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक देश में लोन डिफॉल्ट करने वाले कर्ज़दारों की संख्या करीब 85 लाख के स्तर पर पहुंच चुकी है, जो कि 2023 की शुरुआत में 57 लाख थी।
आक्रामक विदेश नीति से भी हुआ नुकसान
जिनपिंग सरकार की आक्रामक विदेश नीति से भी देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान हुआ है।
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