
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Photo-IANS)
चीन जो दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था माना जाता है, उसकी हालत अब बेहद चिंताजनक हो गई है। सरकारी आंकड़े तो 5 प्रतिशत विकास दर बता रहे हैं, लेकिन असल में यह सिर्फ 2.5 से 3 प्रतिशत के आसपास है। भारी कर्ज, फट चुका प्रॉपर्टी बबल और तेजी से बढ़ती बूढ़ी आबादी ने चीन को मुश्किल में डाल दिया है।
चीन की सरकार अब बड़े पैमाने पर स्टिमुलस पैकेज देने से बच रही है। जियोपॉलिटिकल फ्यूचर्स की रिपोर्ट कहती है कि लोकल सरकारों पर कर्ज का बोझ बहुत ज्यादा हो गया है। इसलिए बीजिंग अब छोटे-छोटे कदम उठा रहा है।
सेलेक्टिव इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च और टारगेटेड क्रेडिट मदद से काम चलाने की कोशिश हो रही है। बड़े स्टिमुलस से पहले जैसा असर भी अब नहीं रह गया है।घरेलू मांग कमजोर, प्रॉपर्टी मार्केट अभी भी दबा हुआदेश के अंदर लोग खर्च करने से डर रहे हैं।
कंज्यूमर सेंटिमेंट कमजोर है, प्राइवेट निवेश नहीं बढ़ रहा। प्रॉपर्टी सेक्टर में लंबे समय से मंदी चल रही है। युवाओं में बेरोजगारी ज्यादा है और महंगाई भी नकारात्मक बनी हुई है। इससे लोग और कंपनियां दोनों सतर्क हो गए हैं।
चीन का निर्यात विभाग अभी भी मजबूत है, जो घरेलू कमजोरी को कुछ हद तक संभाल रहा है। लेकिन मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव से व्यापार अनिश्चितता बढ़ गई है। कच्चे माल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिसका असर चीन की रिकवरी पर पड़ सकता है।
रॉडियम ग्रुप की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की असली समस्या दो हैं। पहला - प्रॉपर्टी बबल फटने से पैदा हुआ भारी खराब कर्ज। दूसरा - कम जन्म दर और तेजी से बढ़ती उम्रदराज आबादी। इन दोनों ने भविष्य को और मुश्किल बना दिया है।
इस बीच, विशेषज्ञों का कहना है कि चीन की अर्थव्यवस्था को संतुलन में रखना अब बहुत कठिन हो गया है। घरेलू मांग कमजोर, प्रॉपर्टी संकट और भू-राजनीतिक जोखिम तीनों एक साथ हैं।
सरकार बड़े जोखिम नहीं लेना चाहती। इसलिए धीरे-धीरे सुधार की नीति अपना रही है। लेकिन अगर ये समस्याएं जस की तस रहीं तो मध्यम अवधि में विकास और भी सुस्त पड़ सकता है। चीन के लिए अब वक्त आ गया है कि वह पुरानी राह छोड़कर नई रणनीति अपनाए। वरना आर्थिक मंदी और गहरी हो सकती है।
Published on:
23 May 2026 05:03 pm
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