China Victory Day Parade 2025: चीन ने द्वितीय विश्व युद्ध में जापान पर जीत की 80वीं वर्षगांठ पर भव्य सैन्य परेड की। शी जिनपिंग ने इस मौके पर वैश्विक शांति और सहयोग का संदेश दिया।
China Victory Day Parade 2025: चीन ने द्वितीय विश्व युद्ध में जीत की 80वीं वर्षगांठ पर 'विक्ट्री डे परेड (China Victory Day 2025)' के बहाने अपनी सैन्य ताकत दिखाई। चीन ने हाइपरसोनिक मिसाइलों (Hypersonic Missile Display China), इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों और मानवरहित लड़ाकू प्लेटफार्मों समेत अपनी सबसे उन्नत सैन्य तकनीक सार्वजनिक तौर पर दिखाते हुए सैन्य परेड निकाली। इसमें 10 हजार से अधिक सैनिक, 100 से अधिक विमान के साथ ही सैकड़ों टैंक और बख्तरबंद वाहन शामिल थे। चीन ने पहली बार हाइपरसोनिक मिसाइलें, ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली (Chinese Military Parade) सार्वजनिक रूप से दिखाई। इसे देखने से पता चलता है कि चीन अपनी सेना को आधुनिक बना रहा है।
बीजिंग के तियानमेन स्क्वायर में आयोजित एक भव्य सैन्य परेड के दौरान उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 66 वर्षों में पहली बार एक साथ मंच पर दिखाई दिए। यह ऐतिहासिक क्षण इन तीनों देशों की अमेरिका और पश्चिमी देशों के प्रति विरोध की साझा भावना और त्रिपक्षीय एकजुटता का प्रतीक माना जा रहा है। समारोह के दौरान तीनों नेताओं ने आपसी बातचीत की और दोस्ताना माहौल में परेड का आनंद लिया, जो चीन द्वारा जापान पर विजय और द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति की 80वीं वर्षगांठ के रूप में आयोजित की गई थी।
राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि चीन युद्ध नहीं चाहता। उन्होंने सभी देशों से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि चीन दुनिया में शांति और सहयोग बढ़ाना चाहता है।
परेड के दौरान ग्रेट वॉल जैसी इमारतों की झलक भी दिखी। यह दिखाता है कि चीन अपने पुराने संघर्षों और धैर्य को नहीं भूला है। हेलीकॉप्टरों से 'शांति की जीत' और 'जनता की जीत' जैसे बैनर लहराए गए।
चीन ने युद्ध में शामिल अपने पुराने सैनिकों और ऐतिहासिक सैन्य टुकड़ियों को याद किया। 80 स्मृति ध्वज भी दिखाए गए जो इन टुकड़ियों को समर्पित थे।
परेड में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन भी शामिल हुए। इसके अलावा पाकिस्तान, नेपाल, ईरान, म्यांमार, इंडोनेशिया जैसे कई देशों के नेता भी आए थे।
चीन ने 1931 से ही जापानी हमलों का सामना करना शुरू कर दिया था। दूसरे विश्व युद्ध में चीन को 3.5 करोड़ जानें गंवानी पड़ीं। यह पूरी दुनिया में सबसे ज़्यादा नुकसान झेलने वाले देशों में से एक था।
इस परेड में चीन के उन शांति सैनिकों को भी शामिल किया गया, जो संयुक्त राष्ट्र के लिए काम कर चुके हैं। इससे पता चलता है कि चीन अब दुनिया भर में भी रक्षा और शांति में भूमिका निभाना चाहता है।