
High-level Committee: ईरान और मध्य पूर्व में गहराते तनाव (Middle East Tension) को देखते हुए भारत सरकार ने कूटनीतिक और रणनीतिक मोर्चे पर एक बड़ा कदम उठाया है। ताज़ा हालातों पर पैनी नज़र रखने और भारत के राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित करने के लिए केंद्र सरकार (Iran Crisis India) ने तीन केंद्रीय मंत्रियों की एक उच्च स्तरीय विशेष समिति (कमेटी) का गठन किया है। इस अहम कमेटी की कमान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सौंपी गई है, जो सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के साथ समन्वय कर हालात की निगरानी (Geopolitical Strategy) करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, गृह मंत्री अमित शाह के अलावा इस कमेटी में विदेश मंत्रालय और रक्षा/वित्त मंत्रालय के शीर्ष मंत्रियों को भी शामिल किया गया है। जिसमें विदेश मंत्री एस जयशंकर और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी शामिल हैं।
यह कमेटी संकट से निपटने के लिए समन्वय करेगी। इस कमेटी का मुख्य उद्देश्य ईरान संकट के कारण उत्पन्न होने वाली किसी भी भू-राजनीतिक (Geopolitical) और आर्थिक चुनौती से तुरंत निपटना है। खाड़ी देशों में इस वक्त लाखों भारतीय नागरिक काम कर रहे हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित निकासी की रूपरेखा तैयार करना इस कमेटी की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
इस महत्वपूर्ण फैसले पर कूटनीतिक विशेषज्ञों और रक्षा जानकारों ने बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। पूर्व राजनयिकों का मानना है कि संकट के समय में भारत सरकार का यह कदम काफी 'प्रो-एक्टिव' (सक्रिय) है। विशेषज्ञों के अनुसार, अमित शाह जैसे वरिष्ठ और कड़े फैसले लेने वाले नेता को इस कमेटी की कमान सौंपना यह संदेश देता है कि भारत अपने नागरिकों और रणनीतिक हितों को लेकर बेहद गंभीर है। राजनीतिक गलियारों में भी इस त्वरित कार्रवाई की सराहना की जा रही है, क्योंकि समय रहते उठाए गए कदमों से ही देश को आर्थिक और कूटनीतिक झटकों से बचाया जा सकता है। इस घटनाक्रम के बाद अब सबकी निगाहें इस नवगठित कमेटी की पहली आधिकारिक बैठक पर टिकी हैं।
आपात बैठक: माना जा रहा है कि अगले 24 से 48 घंटों के भीतर गृह मंत्री अमित शाह इस कमेटी की पहली उच्च स्तरीय बैठक ले सकते हैं। उधर राहुल गांधी ने एलपीजी मुददे पर चर्चा के लिए संसद में नोटिस दिया है। इस विषय पर 4 30 बजे चर्चा होगी।
नई एडवाइजरी: इस बैठक के तुरंत बाद विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा ईरान और आसपास के खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों के लिए एक नई और विस्तृत एडवायजरी (परामर्श) जारी की जा सकती है।
विमानन क्षेत्र पर नजर: नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ मिलकर भारतीय एयरलाइंस के फ्लाइट रूट्स (हवाई मार्गों) में बदलाव को लेकर भी जल्द ही नए दिशानिर्देश आ सकते हैं।
भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बहुत बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व से खरीदता है। ईरान में किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा अर्थ है वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भारी उछाल। अगर तेल महंगा होता है, तो भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे, जिससे ट्रांसपोर्टेशन महंगा होगा और अंततः महंगाई बढ़ेगी।
सामरिक नजरिये से देखें तो, भारत ने पाकिस्तान को दरकिनार कर मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक पहुंचने के लिए ईरान में 'चाबहार बंदरगाह' विकसित किया है। इस संकट की छाया भारत के इस ड्रीम प्रोजेक्ट पर भी पड़ सकती है। अमित शाह की यह कमेटी इस बात पर भी फोकस करेगी कि ईरान संकट का असर भारत की इस अहम सप्लाई चेन और व्यापारिक निवेश पर न पड़े।
Updated on:
12 Mar 2026 02:22 pm
Published on:
12 Mar 2026 02:21 pm
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