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नेपाल चुनाव में चीनी लॉबी पस्त, भारत का असर छाया, बालेन शाह की जीत से वामपंथियों को तगड़ा झटका

नेपाल में बालेन शाह की आंधी चली है। इस चुनाव में चीनी लॉबी को करारा झटका लगा है। वामपंथी पार्टियों के शासनकाल में चीन का प्रभाव बढ़ा था। पढ़ें पूरी खबर...

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Mar 08, 2026
Balen Shah supported the interim government
बालेन शाह (फोटो-IANS)

नेपाल में हुए आम चुनाव में रैपर से नेता बने बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (आरएसपी) बड़ी जीत की ओर बढ़ रही है। चुनाव आयोग के अनुसार, अब तक घोषित 62 सीटों में से पार्टी 49 सीटें जीत चुकी है और करीब 71 अन्य सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। पार्टी ने काठमांडू जिले की सभी 10 सीटें जीत ली हैं। यह चुनाव क्षेत्रीय और वैश्विक शक्ति संतुलन की अहम कहानी बन गया है।

चीनी लॉबी हुई कमजोर

भारत-अमेरिका की कूटनीतिक और रणनीतिक सक्रियता ने चीन की राजनीतिक लॉबी को कमजोर करने में भूमिका निभाई। पिछले एक दशक में नेपाल में चीन का प्रभाव काफी बढ़ा था। बीआरआइ प्रोजेक्ट के तहत निवेश बढ़ा। वामपंथी पार्टियों के साथ चीन के राजनीतिक संबंध भी मजबूत हुए।

कुछ पार्टियों ने अपनाई संतुलित विदेश नीति

इस चुनाव में नेपाली कांग्रेस और कुछ नए राजनीतिक दलों ने संतुलित विदेश नीति और लोकतांत्रिक मूल्यों को मुद्दा बनाया। इन्हें परोक्ष रूप से भारत और अमेरिका की कूटनीतिक सहानुभूति मिलती दिखाई दी। भारत के कुछ हिस्सों को नेपाल के नक्शे में दिखाने का मुद्दे को चुनाव में कई दलों ने राष्ट्रवाद से जोड़ा। कुछ ने कहा कि सीमा विवाद को संवाद से हल करना चाहिए। चीन पर अत्यधिक निर्भरता को लेकर भी चिंताएं सामने आईं।

जेन-Z आंदोलन पर रिपोर्ट आज संभव

नेपाल में जेन-Z आंदोलन के दौरान हुई मौतों और नुकसान की जांच के लिए बनाए गए कार्की आयोग की रिपोर्ट रविवार को सरकार को सौंपी जा सकती है। आयोग ने प्रधानमंत्री सुशीला कार्की से समय मांगा है। सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट चुनाव से पहले ही तैयार हो गई थी, लेकिन राजनीतिक संवेदनशीलता और सुरक्षा कारणों से सरकार ने इसे सार्वजनिक करने से रोक दिया था, ताकि चुनावी माहौल अस्थिर न हो।

Published on:
08 Mar 2026 07:37 am
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