
ईरान (Iran) और अमेरिका (United States of America) के बीच जल्द ही डील हो सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने खुद इस बात की जानकारी दी है। इसके साथ ही उन्होंने ईरान पर किए जाने वाले हमलों पर रोक लगाने के साथ ही ईरान के साथ ही युद्ध खत्म करने का ऐलान भी कर दिया है। इसी बीच अब ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) के वरिष्ठ सैन्य सलाहकार मोहसेन रेज़ाई (Mohsen Rezaei) ने एक बड़ा दावा किया है।
रेज़ाई ने दावा किया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ईरान की 24 बिलियन डॉलर की जब्त संपत्ति/धनराशि छोड़ने के लिए मान गए हैं। भारतीय करेंसी में इसकी वैल्यू करीब 2,28,413,88,00,000 रूपए है। रेज़ाई ने यह भी कहा है कि ट्रंप इस फैसले को सार्वजनिक नहीं करना चाहते हैं।
इज़रायल (Israel) इस फैसले के खिलाफ है। इज़रायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) नहीं चाहते कि अमेरिका के साथ डील के तहत ईरान की जब्त संपत्ति को छोड़ा जाए। इसी वजह से इज़रायल की तरफ से अमेरिका पर ऐसा न करने का दबाव बनाया जा रहा है।
दशकों से अमेरिकी और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण ईरान की करीब 100 बिलियन डॉलर से ज़्यादा संपत्ति/धनराशि विदेशी बैंकों में फंसी हुई है। इनमें से 24 बिलियन डॉलर की धनराशि ईरान शांति समझौते के लिए अमेरिका से मांग रहा है, जो उसके लिए बेहद ही अहम है। इससे ईरान की अर्थव्यवस्था को काफी फायदा पहुंच सकता है। इस धनराशि से ईरानी सेंट्रल बैंक के विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ेंगे, रियाल की विनिमय दर स्थिर होगी, ज़रूरी आयात (तेल उपकरण, कच्चा माल, दवाएं) आसान होंगे और सरकारी खर्च के साथ ही देश में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए भी फंड मिलेगा। लंबे समय से युद्ध और प्रतिबंधों की मार झेल रहे ईरान की अर्थव्यवस्था को इससे काफी मदद मिलेगी, देश में मुद्रास्फीति कम होगी और जनता के लिए भी यह एक बड़ी राहत होगी।
दोनों देशों के बीच डील पर ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) की प्रतिक्रिया सामने आ गई है। अराघची ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, "इस्लामाबाद MoU पर हस्ताक्षर होने में अब पहले से कहीं ज़्यादा करीबी है। इसके अंतिम रूप दिए जाने तक मीडिया को इसकी विषयवस्तु के बारे में अटकलें लगाने से बचना चाहिए। हमारी ज़िम्मेदार और पारदर्शी नीति के अनुसार सभी डिटेल्स समय आने पर जनता के साथ शेयर की जाएंगी।"