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स्मार्ट ड्रेसिंग: अब घाव खुद बताएगा कब चाहिए एंटीबायोटिक, संक्रमण पहचानकर स्वतः छोड़ेगी दवा

Medical Innovation: ब्राउन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने विकसित की ऐसी स्मार्ट ड्रेसिंग, जो खतरनाक बैक्टीरिया की मौजूदगी का पता लगाकर जरूरत पड़ने पर स्वतः एंटीबायोटिक छोड़ती है और घाव की लगातार निगरानी भी करती है।

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Smart dressing treating an infected wound.

(Photo Credit - Brown university)

Smart Dressing: कैसा हो जब आप अपने घाव पर पट्टी बांधे और वह केवल घाव को ढकने का ही काम न करे, बल्कि जरूरत पड़ने पर एंटीबायोटिक भी छोड़े। अमरीका की ब्राउन यूनिवर्सिटी के बायोमेडिकल इंजीनियरों ने एक ऐसी ही 'स्मार्ट ड्रेसिंग' (घाव पर लगाने वाली पट्टी) विकसित की है, जो अपने आप यह पहचान सकती है कि घाव में खतरनाक बैक्टीरिया मौजूद हैं या नहीं। इतना ही नहीं यह जख्म के हिसाब से दवा भी छोड़ता है। यह स्मार्ट बैंडेज लगातार घाव की स्थिति पर नजर भी रखती है। इसमें मौजूद सेंसर बैक्टीरिया के खतरनाक संकेत मिलने पर सक्रिय होते है और फिर उनके खात्मे के लिए एंटीबायोटिक छोड़ते है।

बैक्टीरिया का संकेत मिलते ही दवा का रिसाव

यह सिस्टम खास तौर पर उन बैक्टीरिया को पहचानता है, जो बीटा-लैक्टामेज नामक एंजाइम बनाते हैं। ये एंजाइम अक्सर खतरनाक संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया में पाए जाते हैं। जैसे ही यह हाइड्रोजेल इन एंजाइम्स को पहचानता है, यह टूटने लगता है और उसके अंदर मौजूद एंटीबायोटिक धीरे-धीरे सीधे घाव में रिलीज हो जाती है। इससे दवा ठीक उसी समय और उसी जगह पहुंचती है, जहां जरूरत होती है।

सामान्य ड्रेसिंग से बेहतर परिणाम मिले

चूहों पर किए गए प्रयोगों में पाया गया कि एक बार लगाए गए हाइड्रोजेल ने घाव के बैक्टीरियल संक्रमण को पूरी तरह खत्म कर दिया। यह मौजूदा इस्तेमाल होने वाले एंटीमाइक्रोबियल ड्रेसिंग से बेहतर साबित हुआ। शोधकर्ताओं ने इस सामग्री का पेटेंट भी करा लिया है और इसे आगे चलकर व्यावसायिक उपयोग के लिए विकसित करने पर काम जारी है।

अध्ययनों से पता चलता है कि दुनिया भर में हर वर्ष 10 लाख (1 मिलियन) से अधिक लोगों की मृत्यु ऐसे संक्रमणों के कारण होती है, जिन पर सामान्य एंटीबायोटिक दवाएं असर नहीं करतीं। यदि एंटीबायोटिक दवाओं के अत्यधिक और अनावश्यक उपयोग को कम करने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या और गंभीर हो सकती है। अनुमान है कि वर्ष 2050 तक प्रतिवर्ष लगभग 1 करोड़ (10 मिलियन) मौतें एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (रोगाणुरोधी प्रतिरोधकता) से जुड़ी हो सकती हैं।

शोधकर्ताओं की टीम ने इस नई सामग्री का पेटेंट करा लिया है और अब वे इस तकनीक को और अधिक विकसित करने पर काम कर रहे हैं, ताकि भविष्य में इसे व्यावसायिक रूप से बाजार में उतारा जा सके।