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भारत-बांग्लादेश के चलते पाक को लगने वाला है बड़ा झटका, ट्रंप ने मुनीर-शहबाज को कहीं का नहीं छोड़ा?

इस साल पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति और खराब होने की आशंका है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मदद देने वाले देश अब पीछे हट रहे हैं, जिससे आर्थिक संकट गहरा सकता है।
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Feb 18, 2026
Shehbaz Sharif and Donald Trump
पाक पीएम शहबाज शरीफ और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। (फोटो- X)

इस साल पाकिस्तान की आर्थिक हालत और खराब होने की संभावना है। कुछ ऐसी रिपोर्ट्स सामने आईं हैं, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि दुनिया के तमाम देश अब पाकिस्तान को आर्थिक मदद देने से पीछे हट रहे हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी पाकिस्तान को बुरी तरह से फंसा दिया है। कराची के बिजनेस रिकॉर्डर के एक आर्टिकल के मुताबिक, ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन के साथ पाक सरकार के अच्छे और दोस्ताना रिश्ते अपना चार्म खो रहे हैं।

भारत-बांग्लादेश से अच्छी ट्रेड डील

पाकिस्तान से जारी हुई रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका ने पाकिस्तान से बेहतर टैरिफ पर भारत के साथ एक ट्रेड डील की है। बांग्लादेश ने भी अमेरिका से कॉटन इंपोर्ट करते समय टेक्सटाइल प्रोडक्ट्स पर जीरो ड्यूटी पाने के लिए ट्रंप से अपने टैरिफ अरेंजमेंट में बदलाव किया है। दूसरे देश भी अमेरिका और बाकी दुनिया के साथ बातचीत जारी रखे हुए हैं।

संयुक्त अरब अमीरात से भी तनाव

उधर खबर यह भी है कि पाकिस्तान-संयुक्त अरब अमीरात रिश्तों में साफ तौर पर तनाव दिख रहा है। यूएई डिपॉजिट के मंथली रोलओवर से ऐसा संकेत मिला है, जो 6.5 परसेंट की ज्यादा रेट पर है। जबकि पाक सरकार को पहले आधी रेट पर दो साल के रोलओवर का भरोसा था।

ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, फौजी फाउंडेशन कंपनियों में यूएई का संभावित इन्वेस्टमेंट भी अभी अधर में है। दूसरी ओर, चीन से किसी भी तरह की एक्स्ट्रा आर्थिक मदद पर रेडियो साइलेंस है। CPEC फेज-2 पूरी तरह से ठंडे बस्ते में है।

चीन से भी कम हुई उम्मीद

आर्टिकल में कहा गया है कि चीनी पावर सेक्टर के कर्ज पर फिर से बातचीत की उम्मीद बहुत कम है, क्योंकि चीन लेट पेमेंट सरचार्ज माफ करने से साफ इनकार कर चुका है। जिससे पावर सेक्टर के सर्कुलर डेट स्टॉक के सेटलमेंट में देरी हो रही है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि बलूचिस्तान में बढ़ती सुरक्षा चिंताओं ने कई फाइनेंशियल उपायों को अनिश्चित काल के लिए टाल दिया है, जबकि इसे गेम-चेंजर बताया जा रहा था। दूसरी ओर, स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान भी भारी आर्थिक संकटों से गुजर रहा है। जिससे सरकार की मुश्किलें और बढ़ गईं हैं।

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