
US Aid to Israel: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इजरायल को दी जाने वाली लगभग 4 अरब डॉलर की सालाना आर्थिक और सैन्य सहायता बंद करने के ऐलान के बाद वहां की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इजरायल के विपक्षी नेता यायर लैपिड ने ट्रंप के फैसले की आलोचना करते हुए इसे देश के इतिहास की सबसे गंभीर राजनीतिक और सुरक्षा विफलताओं में से एक बताया है। उन्होंने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि उन्होंने इस स्थिति से निपटने की पहले से तैयारी नहीं की।
फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए इजरायल के विपक्षी नेता यायर लैपिड ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी सरकार पर तीखा प्रहार किया। लैपिड ने कहा कि यह समझ से परे है कि नेतन्याहू ने इस फैसले के सामने पूरी तरह घुटने टेक दिए और आत्मसमर्पण कर दिया। इससे भी ज्यादा हैरानी की बात है कि उन्होंने देश की सुरक्षा व्यवस्था को इसके लिए तैयार नहीं किया।
लैपिड के अनुसार, अमेरिकी सहायता बंद होने से इजरायल की रक्षा तैयारियों पर असर पड़ सकता है। क्षेत्र में चल रही सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए, ऐसा फैसला इजरायल के लिए चिंता का एक बड़ा कारण है।
इजरायली डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता यायर गोलान ने भी इस कदम को देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका बताया है। गोलान ने कहा कि अमेरिकी वित्तीय सहायता बंद होने से रक्षा बजट का पूरा बोझ आम इजरायली करदाताओं के कंधों पर आ जाएगा।
उन्होंने बताया कि चल रहे सैन्य अभियानों के कारण देश की वायु रक्षा प्रणालियों और गोला-बारूद के भंडार को लगातार फिर से भरने की आवश्यकता होती है। ऐसे समय में वित्तीय सहायता वापस लेने से राष्ट्रीय सुरक्षा की तैयारियों पर असर पड़ सकता है।
दरअसल, ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका इस साल के अंत तक इजरायल को दी जाने वाली लगभग 4 अरब डॉलर की वार्षिक सहायता को रोक देगा। फॉक्स न्यूज के साथ एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि इजरायल आर्थिक रूप से मजबूत है और अब अपने हथियार खुद खरीदने में सक्षम है। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ बातचीत के दौरान इस सहायता को धीरे-धीरे खत्म करने की संभावना पर चर्चा हुई थी।
गौरतलब है कि 2016 में अमेरिका और इजरायल के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत अमेरिका ने 2028 तक इजरायल को सालाना लगभग 3.8 अरब डॉलर की सैन्य सहायता और मिसाइल रक्षा कार्यक्रमों के लिए फंडिंग देने का वादा किया था। ट्रंप के इस फैसले से 2028 तक चलने वाले इस रक्षा सहयोग को समय से पहले ही खत्म होने की कगार पर ला खड़ा किया है। इससे इजरायल के भीतर सत्ताधारी गठबंधन और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव शुरू हो गया है।