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हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर किए हमले, आभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और खमीस मुशैत एयरबेस को बनाया निशाना

Houthis-Saudi Arabia Conflict: हूती विद्रोहियों ने फिर से सऊदी अरब पर हमले किए हैं। एक जगह बैलिस्टिक मिसाइल तो दूसरी जगह ड्रोन से हमला किया गया है।
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भारत

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Tanay Mishra

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Updated: 3 Nov 2026, 9:07 PM IST

Houthis missile attack

हूती विद्रोहियों ने दागी मिसाइल (Photo - ANI)

यमन (Yemen) के हूती विद्रोहियों (Houthis) की देश की सरकारी सेना के साथ ही सऊदी अरब (Saudi Arabia) से भी जंग चल रही है। हूती विद्रोही और सऊदी अरब पिछले करीब ढाई महीने में एक-दूसरे पर कई हमले कर चुके हैं और अभी भी हमलों का सिलसिला थमा नहीं है। आज एक बार फिर हूतियों ने सऊदी अरब पर हमले किए हैं। हूती विद्रोहियों ने दो जगहों को निशाना बनाया।

कहाँ किए हमले?

हूतियों ने जानकारी दी कि आज उन्होंने सऊदी अरब पर दो हमले किए हैं। एक हमला ड्रोन से आभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर किया गया और एक हमला बैलिस्टिक मिसाइल से खमीस मुशैत एयरबेस पर किया गया।

एयरपोर्ट संचालन हुआ बाधित, एयरबेस को पहुंचा नुकसान

हूतियों ने दावा किया कि ड्रोन हमले की वजह से आभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का संचालन बाधित हुआ। वहीँ बैलिस्टिक मिसाइल सीधे खमीस मुशैत एयरबेस पर जाकर लगी। बताया जा रहा है कि इस वजह से एयरबेस को नुकसान पहुंचा है।

सैन्य ठिकाने, एयरपोर्ट्स और तेल रिफाइनरियाँ हैं हूतियों के मुख्य निशाने

सऊदी अरब पर पिछले कुछ महीनों में हूतियों ने कई हमले किए हैं। इन हमलों में ज़्यादातर सैन्य ठिकानों, एयरपोर्ट्स और तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाया गया है। सैन्य ठिकानों पर हमलों के ज़रिए हूती सऊदी अरब की सैन्य क्षमता को कमजोर करना चाहते हैं। एयरपोर्ट्स पर हमलों के ज़रिए हूती सऊदी अरब पर दबाव बनाने, हवाई यात्रा बाधित करने और आर्थिक नुकसान पहुंचाने का काम करते हैं। तेल रिफाइनरियों पर हमले के ज़रिए भी हूती सऊदी अरब को आर्थिक झटका देने का काम करते हैं क्योंकि सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था में तेल की अहम भूमिका है।

हूती विद्रोही और सऊदी अरब क्यों हैं एक-दूसरे के खिलाफ?

यमन में 2014 के आखिर में संघर्ष तब शुरू हुआ जब हूतियों ने सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया। इसके बाद सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने मार्च 2015 में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में दखल दिया। तभी से दोनों पक्षों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है और दोनों ही एक-दूसरे के खिलाफ हैं। हूतियों को ईरान (Iran) का समर्थन प्राप्त है तो वहीँ सऊदी अरब की तरफ से यमन की सरकारी सेना को समर्थन प्राप्त है।