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Iran-US Peace Deal: क्या ईरान से हुए शांति समझौते पर दुनिया से झूठ बोल रहे हैं डोनाल्ड ट्रंप?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान से हुए शांति समझौते पर बयानबाजी करने से पीछे नहीं हट रहे हैं। वह इसे अपनी जीत के तौर पर पेश कर रहे हैं, लेकिन ट्रंप के कई बयानों का ईरान खंडन कर रहा है।
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Updated: 24 Jun 2026, 12:41 PM IST
Donald Trump
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। (फोटो- IANS)

ईरान (Iran) और अमेरिका (United States of America) के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर हो गए हैं, जिसके तहत युद्ध का स्थायी अंत, होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) खोलना, अमेरिकी नाकेबंदी हटाना, आर्थिक राहत और अन्य दूसरे प्रावधान शामिल हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) लगातार ईरान से हुए हुए शांति समझौते पर बयान दे रहे हैं। ट्रंप के अनुसार यह अमेरिका के लिए एक बड़ी जीत है। उनका यह भी कहना है कि ईरान ने कई अहम रियायतें दी हैं, लेकिन ईरानी अधिकारी ट्रंप के इन बयानों का लगातार खंडन कर रहे हैं।

क्या ट्रंप बोल रहे हैं झूठ?

ट्रंप लगातार दावा कर रहे हैं कि ईरान ने अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (International Atomic Energy Agency - IAEA) के निरीक्षकों को देश में क्षतिग्रस्त परमाणु ठिकानों में प्रवेश और जांच की अनुमति दी है। ट्रंप ने कहा कि ईरान ने पूरी जांच कराने की शर्त को स्वीकार किया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने भी यह दावा किया है। हालांकि ईरान ने इस दावे को खारिज कर दिया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई (Esmaeil Baghaei) ने इसका खंडन कर दिया है और कहा है कि अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के साथ सहयोग पुराने सुरक्षा समझौतों के तहत ही जारी रहेगा और इसमें कोई बदलाव नहीं होगा और न ही इस एजेंसी के निरीक्षकों को देश में किसी तरह की जांच करने दी जाएगी। बघाई ने साफ कर दिया कि अमेरिका से शांति समझौते के तहत ईरान ने IAEA के साथ कोई नई प्रतिबद्धता नहीं की है।

इसके अलावा ट्रंप यह भी कह रहे हैं कि ईरान की जब्त धनराशि/संपत्तियों के फंड को अनब्लॉक करने पर ईरान उसका इस्तेमाल अमेरिका से सामान खरीदने के लिए करेगा, लेकिन ईरान ने इसका भी खंडन किया है और साफ कर दिया है कि इस फंड पर ईरान का कंट्रोल रहेगा और वो जैसे चाहे इसका इस्तेमाल करेगा।

शांति समझौते के बावजूद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ तनाव

दोनों देशों के बीच शांति समझौता तो हो गया है, लेकिन तनाव पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। ट्रंप इसे बड़ी जीत बता रहे हैं, जबकि आलोचक इसे ईरान को दी गई बड़ी रियायत मानते हैं। ईरान का कहना है कि अमेरिका अपनी बात बदल रहा है, जबकि ट्रंप प्रशासन ईरानी झूठ का आरोप लगा रहा है।