अमेरिका ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बार फिर नाटो पर गुस्सा फूट पड़ा है। क्या कहा अमेरिकी राष्ट्रपति ने? आइए जानते हैं।
ईरान-अमेरिका इज़रायल युद्ध (Iran-US Israel) काफी गंभीर हो चुका है। आज इस युद्ध का 39वां दिन है। अमेरिका (United States of America) के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान को धमकी दी है कि अगर ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को नहीं खोला और युद्ध खत्म करने के लिए सीज़फायर समझौता करने से इनकार किया, तो ईरान के पावर प्लांट्स और पुलों को तबाह कर दिया जाएगा। ट्रंप ने ईरान को मंगलवार रात 8 बजे (भारतीय समयानुसार बुधवार सुबह 5:30 बजे) तक की डेडलाइन दी है। हालांकि ईरान ने भी सीज़फायर प्रस्ताव को ठुकराते हुए युद्ध के स्थायी अंत की डिमांड कर दी है। इस युद्ध के दौरान ट्रंप और नाटो (NATO) के बीच दरार भी बढ़ गई है और एक बार फिर ट्रंप का नाटो पर गुस्सा फूट पड़ा है।
कुछ दिन पहले भी ट्रंप ने नाटो के प्रति अपनी नाराज़गी जताई थी। ट्रंप ने बताया था कि होर्मुज स्ट्रेट खोलने में मदद के लिए नाटो के सदस्य देशों ने युद्धपोत भेजने से इनकार कर दिया था, जिससे ट्रंप नाराज़ हो गए। ट्रंप ने नाटो को एकतरफा और फायदेमंद गठबंधन बताया था। अब एक बार फिर ट्रंप ने ईरान के खिलाफ युद्ध में मदद नहीं करने के लिए नाटो पर निशाना साधा है। ट्रंप ने कहा, "हम नाटो के पास मदद के लिए गए थे। हमने ज़्यादा जोर देकर मदद नहीं मांगी। सिर्फ इतना ही कहा कि अगर आप हमारी मदद करते हो तो काफी अच्छा होगा। लेकिन नाटो ने हमारी मदद नहीं की। नाटो 'कागजी शेर' है और रूस (Russia) के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) भी नाटो से नहीं डरते।"
गौरतलब है कि ट्रंप से पहले पुतिन भी कुछ महीने पहले नाटो को 'कागजी शेर' बता चुके हैं। ट्रंप ने रूस को 'कागजी शेर' बताया था जिसके जवाब में पुतिन ने कहा था कि रूस सभी नाटो देशों से निपट रहा है, लेकिन नाटो मिलकर भी रूस से नहीं निपट पा रहा, तो ऐसे में नाटो ही 'कागजी शेर' है।
ट्रंप ने इस दौरान ग्रीनलैंड (Greenland) पर कब्ज़ा करने की इच्छा भी दोहराई। ट्रंप पहले भी कई मौकों पर ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा करने की इच्छा जता चुके हैं, जिसका ग्रीनलैंड, डेनमार्क (Denmark) और पूरा यूरोप (Europe) विरोध कर रहा है।