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Iran Peace Deal: अमेरिका व ईरान के बीच सीजफायर पर बड़ी खबर, मार्को रूबियो के खुलासे से मची हलचल

US-Iran Conflict : अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भयंकर तनाव के बीच शांति समझौते की उम्मीद जगी है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अपने भारत दौरे पर ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत में 'सकारात्मक प्रगति' का दावा किया है।

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भारत

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MI Zahir

May 23, 2026

Marco Rubio said Progress being made toward peace deal with Iran

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि ईरान के साथ शांति समझौते की दिशा में प्रगति हो रही है। ( फोटो: ANI)

Marco Rubio: अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की ओर कदम आगे बढ़े हैं। भारत दौरे के दौरान मार्को रुबियो ने बड़ा दावा किया है। मिडिल ईस्ट में महीनों से जारी तनाव के बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है। भारत की चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिया है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है। नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास में एक विशेष कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वाशिंगटन इस जटिल मुद्दे का कूटनीति के जरिये शांतिपूर्ण समाधान चाहता है।

अमेरिका की दो टूक: परमाणु हथियार किसी कीमत पर नहीं

विदेश मंत्री ने अमेरिकी प्रशासन का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि पर्दे के पीछे बहुत सा कूटनीतिक काम चल रहा है। उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्राथमिकताओं को सामने रखते हुए कहा कि अमेरिका इस विवाद का कूटनीतिक हल ही चाहता है। हालांकि, इसके लिए वाशिंगटन ने कुछ सख्त शर्तें भी रखी हैं। रुबियो ने दो टूक कहा, "ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकता। उन्हें अपना संवर्धित यूरेनियम हर हाल में हमें सौंपना होगा।" इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए समुद्री रास्तों (जलडमरूमध्य) को पूरी तरह से मुक्त रखने की भी शर्त रखी गई है।

ईरान का पलटवार: 'ट्रंप ने गलती की तो अंजाम बुरा होगा'

एक तरफ जहां अमेरिका कूटनीतिक सफलता का दावा कर रहा है, वहीं ईरान की तरफ से तीखे बयान सामने आ रहे हैं। ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बगेर बालिबफ ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि अगर राष्ट्रपति ट्रंप ने सैन्य हमले की गलती दोहराई, तो इस बार का जवाब अमेरिका के लिए पहले से कहीं अधिक विनाशकारी होगा। ईरान का दावा है कि उसने 8 अप्रेल से लागू छह सप्ताह के युद्धविराम के दौरान अपनी सैन्य ताकत फिर से मजबूत कर ली है।

पाकिस्तान की एंट्री और मध्यस्थता का जाल

इस भू-राजनीतिक खेल में अब पाकिस्तान की भूमिका भी अहम हो गई है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने हाल ही में तेहरान का दौरा किया है। उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची और राष्ट्रपति मसूद पेजेशकिययन से लंबी बातचीत की है। ईरान इस विवाद को सुलझाने के लिए पाकिस्तान, ओमान, तुर्की, कतर और इराक जैसे देशों के साथ लगातार संपर्क में है।

आखिर क्या है इस विवाद की जड़ ?

गौरतलब है कि इस साल 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त हमला किया था, जिसके बाद ईरान ने पूरे मध्य पूर्व में मिसाइलों और ड्रोन्स की झड़ी लगा दी थी। फिलहाल एक नाजुक युद्धविराम लागू है। दोनों ही पक्ष बैक-चैनल के माध्यम से शांति का रास्ता तलाश रहे हैं। हालांकि, ईरान ने अमेरिका पर वार्ता में "अत्यधिक मांगें" थोपने का आरोप लगाया है, जिससे स्थायी शांति की राह अभी भी कांटों भरी नजर आ रही है।

शांति वार्ता में 'प्रगति' के दावे का स्वागत

अंतरराष्ट्रीय मंचों और कूटनीतिक हलकों ने शांति वार्ता में 'प्रगति' के दावे का स्वागत किया है। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान द्वारा यूरेनियम सौंपने की अमेरिकी शर्त इस समझौते में सबसे बड़ा रोड़ा बन सकती है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या ईरान अमेरिकी प्रस्तावों पर नरम रुख अपनाता है। इसके अलावा, ओमान और कतर के जरिए चल रही 'गुप्त कूटनीति' के नतीजे आने वाले कुछ हफ्तों में मध्य पूर्व का भविष्य तय करेंगे।

आसिम मुनीर की मध्यस्थता ने एक नया कूटनीतिक पहलू जोड़ा

बहरहाल, इस पूरी शांति प्रक्रिया में पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर की मध्यस्थता ने एक नया कूटनीतिक पहलू जोड़ दिया है। यह दर्शाता है कि ईरान अपने क्षेत्रीय पड़ोसियों को विश्वास में लेकर अमेरिका पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रहा है। (इनपुट: ANI)