
वाशिंगटन। मिडटर्म चुनाव में करारी हार के बाद अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन चौतरफा दबाव में है। संसद के दोनों सदनों (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट) का नियंत्रण गंवाने के बाद रिपब्लिकन पार्टी को अब डेमोक्रेट्स की जांच-पड़ताल और जवाबदेही के सवालों का सामना करना पड़ेगा। डेमोक्रेट्स ने ट्रंप परिवार के कारोबारी हितों, सरकारी अनुबंधों और प्रशासनिक फैसलों की पड़ताल के संकेत दिए हैं।
डेमोक्रेट्स की प्राथमिकता सूची में ट्रंप परिवार के कारोबारी सौदे और वे कंपनियां हैं, जिन्हें प्रशासन से ठेके या वित्तीय लाभ मिले हैं। जांच का दायरा कॉरपोरेट हितों, क्रिटिकल मिनरल्स से जुड़े समझौतों और जेफ्री एपस्टीन से संबंधित फाइलों तक जा सकता है। एलन मस्क और सरकारी ठेकेदारों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। फिलहाल, डेमोक्रेट्स ट्रंप के खिलाफ महाभियोग भी ला सकते हैं। हालांकि, इसको पास कराने के लिए बहुमत की कमी है। कई नेताओं ने अमरीकी मीडिया से बातचीत में महाभियोग के प्रस्ताव से इनकार नहीं किया है। उधर, ट्रंप के खिलाफ जांच की फाइल को अटकाने वाले न्याय विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी इस्तीफा दे दिया है।
ट्रंप ने मीडिया से कहा कि उनकी टीम और कैबिनेट में कुछ बदलाव किए जाएंगे। चुनाव में हार के बाद चीजों की नए सिरे से समीक्षा और जिम्मेदारी तय करना स्वाभाविक है। उन्होंने माना कि मिडटर्म चुनाव के नतीजे उनकी पार्टी के लिए बड़ा संकेत हैं और प्रशासन को जनता की उम्मीदों के अनुरूप कार्यशैली व प्राथमिकताओं में बदलाव करना होगा।
नागरिक अधिकार विभाग की प्रमुख हरमीत ढिल्लों ने सबसे पहले इस्तीफा दिया। इसके बाद दक्षिणी फ्लोरिडा के अमरीकी अटॉर्नी जेसन रेडिंग क्विनोनेस और न्याय विभाग के राष्ट्रीय सुरक्षा विभाग के प्रमुख जॉन आइजनबर्ग ने भी पद छोड़ दिया। क्विनोनेस का कार्यालय ट्रंप के खिलाफ पहले हुई जांचों की समीक्षा से जुड़ा था। इन पर आरोप था कि इन्होंने ट्रंप के आपराधिक मामलों से जुड़ी जांच की फाइल को अटकाया था।
व्हाइट हाउस में चीफ ऑफ स्टाफ के पद पर बड़ा फेरबदल हुआ है। ट्रंप ने सुसी वाइल्स की जगह स्टीफन मिलर को नियुक्त किया है। मिलर 9 नवंबर से जिम्मेदारी संभालेंगे। वे ट्रंप के करीबी सहयोगी और सख्त आव्रजन नीतियों के प्रमुख रणनीतिकार माने जाते हैं।
टेक्सास के ह्यूस्टन में मेयर जॉन व्हिटमायर ने पुलिस को निर्देश दिया है कि ट्रैफिक जांच के दौरान केवल सिविल इमिग्रेशन वारंट के आधार पर आइसीई को सूचना न दी जाए। पुलिस आइसीई से तभी संपर्क करेगी, जब संबंधित व्यक्ति को जेल की सजा वाले अपराध में गिरफ्तार किया जा रहा हो।