मुरिदके का यह प्रशिक्षण केंद्र भारत के खिलाफ लश्कर-ए-तैयबा की गतिविधियों का एक अहम हिस्सा रहा है। मुंबई में 26/11 के हमले, 2005 में दिल्ली में हुए बम धमाकों और 2000 में लाल किले पर हुए हमले को अंजाम देने वाले आतंकवादियों को इसी केंद्र में प्रशिक्षित किया गया था। इसके अलावा, मुरीदके स्थित केंद्र का इस्तेमाल जैश-ए-मोहम्मद के कैडरों ने भी किया था—जो उस समय एक अपेक्षाकृत नया संगठन था—ताकि वे 2001 में भारतीय संसद पर हुए हमले के लिए ट्रेनिंग ले सकें।