Iran-US Israel War: ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध को एक महीने से ज़्यादा समय हो चुका है। इतने लंबे युद्ध की वजह से अमेरिका को आर्थिक रूप से भारी नुकसान हो चुका है। ऐसे में युद्ध को जारी रखने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी ने नया प्लान सोचा है।
अमेरिका (United States Of America) और इज़रायल (Israel) और ईरान (Iran) के बीच चल रहे युद्ध का आज 32वां दिन है। अमेरिका और इज़रायल की तरफ से लगातार ईरान पर हमले किए जा रहे हैं। ईरान भी इज़रायल और मिडिल ईस्ट (Middle East) में अमेरिका के सहयोगी देशों पर हमले कर रहा है। ईरान के खिलाफ युद्ध की वजह से अमेरिका को हर दिन भारी खर्चा हो रहा है। अगर अमेरिका युद्ध को जारी रखना चाहता है, तो उसे भारी आर्थिक सहायता की ज़रूरत पड़ेगी। ऐसे मे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की रिपब्लिकन पार्टी (Republican Party) ने एक नया प्लान बनाया है।
ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी अमेरिका में हेल्थकेयर बजट में कटौती करके ईरान के खिलाफ युद्ध में फंडिंग करना चाहती है। हाल ही में आई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी कांग्रेस में रिपब्लिकन नेता हेल्थकेयर पर खर्च घटाकर पेंटागन (Pentagon) को 200 बिलियन डॉलर्स की अतिरिक्त फंडिंग देने के प्लान पर विचार कर रहे हैं।
रिपब्लिकन पार्टी का तर्क है कि राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकता है। ट्रंप प्रशासन ईरान को परमाणु खतरे और क्षेत्रीय अस्थिरता का स्रोत मानता है। इसी वजह से वो चाहते हैं कि युद्ध को हर हाल में जीता जाए, भले ही इसके लिए हेल्थकेयर बजट में कटौती करनी पड़े।
डेमोक्रेटिक पार्टी (Democratic Party) ने इस प्लान की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे अनैतिक बताया और कहा कि रिपब्लिकन पार्टी अमेरिकियों की सेहत से खिलवाड़ करके हेल्थकेयर बजट घटाकर उस पैसे को युद्ध पर खर्च करना चाहती है, जो बिल्कुल सही नहीं है। डेमोक्रेटिक कांग्रेस कमेटी ने इसे चुनावी मुद्दा बनाते हुए कहा कि इससे लाखों गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार प्रभावित होंगे। हेल्थकेयर बजट में कटौती से प्रीमियम बढ़ेंगे, बीमा कवरेज घटेगा और अस्पताल संकट गहराएगा। इलाज और दवाएं महंगी होंगी जिससे लोगों की जेब पर असर पड़ेगा। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि इससे लाखों लोग स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित हो सकते हैं। इस युद्ध में पहले से ही 30 बिलियन डॉलर्स से ज़्यादा खर्च हो चुका है और इस वजह से देश में महंगाई बढ़ रही है और अर्थव्यवस्था को झटका लग रहा है।