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‘अमेरिका से डील करने के लिए बेताब है ईरान’, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा

Iran-US Deal: ईरान और अमेरिका के बीच डील पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर बयान दिया है। क्या कहा ट्रंप ने? आइए नज़र डालते हैं।
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May 23, 2026
Donald Trump
डोनाल्ड ट्रंप (Photo - Washington Post)

अमेरिका (United States of America) और ईरान (Iran) के बीच अभी भी तनाव खत्म नहीं हुआ है। सीज़फायर के बीच दोनों देशों के बीच पाकिस्तान (Pakistan) की मध्यस्थता में बातचीत जारी है। इस समय ईरान अमेरिका की तरफ से पेश किए गए शांति-प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है। हालांकि अभी तक दोनों देशों के बीच कोई डील नहीं हुई है। इसी बीच अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने इस बारे में एक बार फिर बयान दिया है।

अमेरिका से डील करने के लिए बेताब है ईरान

शुक्रवार को व्हाइट हाउस में नए फेडरल रिज़र्व चेयरमैन केविन वार्श (Kevin Warsh) के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान ट्रंप ने आर्थिक संदेशों के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा और अमेरिका की सैन्य स्थिति पर भी बात की। ट्रंप ने कहा, "अमेरिका से डील करने के लिए ईरान बेताब है, लेकिन अमेरिका ईरान पर दबाव बनाए रखेगा क्योंकि ईरान परमाणु हथियार नहीं रख सकता। हमारे पास दुनिया की सबसे बड़ी और शक्तिशाली सेना है। देखते हैं आगे क्या होता है, लेकिन हमने उन पर घातक हमले किए हैं क्योंकि हमारे पास कोई विकल्प नहीं था।"

दोनों देशों के बीच डील नहीं होने की क्या है मुख्य वजह?

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता और संभावित डील मुख्य रूप से ईरान के परमाणु प्रोग्राम के कारण अटकी हुई है। अमेरिका की मांग है कि ईरान अपना यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद कर दे और अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम के भंडार को किसी अन्य देश को सौंप दे। इसके साथ ही अमेरिका यह भी चाहता है कि ईरान अपनी परमाणु सुविधाओं को सीमित या बंद करे। ट्रंप का कहना है कि इससे ही ईरान के परमाणु हथियार बनाने की क्षमता समाप्त हो सकेगी।

वहीँ ईरान इसके खिलाफ है और इस मांग को अपनी संप्रभुता पर हमला मानता है। ईरान कुछ वर्षों के लिए यूरेनियम संवर्धन सीमित करने के लिए तैयार है लेकिन इसे पूरी तरह बंद करने के खिलाफ है। इसके अलावा ईरान अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम के भंडार को किसी अन्य देश को नहीं देना चाहता। परमाणु प्रोग्राम पर ईरान का पक्ष शुरू से साफ है कि उनका देश परमाणु हथियार नहीं बनाना चाहता, बल्कि शांतिपूर्ण तरीके से परमाणु ऊर्जा विकसित करना चाहता है, जिसके इस्तेमाल देशवासियों की भलाई के लिए किया जा सके।

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