
ईरान-अमेरिका इज़रायल युद्ध (Iran-US Israel War) की वजह से होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) बंद होने के कारण दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं, जिसका असर पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों पर भी पड़ा। हालांकि अब युद्ध भी पूरी तरह से खत्म हो चुका है और होर्मुज स्ट्रेट भी पूरी तरह से खुल चुका है। तेल के जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है। इसी बीच अमेरिका (United States of America) के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने बड़ी तेल कंपनियों के सही से कीमतें नहीं घटाने पर नाराज़गी जताई है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, "बड़ी तेल कंपनियाँ तेल के लिए जो कम कीमत चुका रही हैं, उसके हिसाब से वो पेट्रोल पंप पर कीमतें कम नहीं कर रही हैं। तेल की कीमतें तो तेज़ी से गिर रही हैं। दूसरे शब्दों में, ग्राहकों से बहुत ज़्यादा पैसे वसूले जा रहे हैं। मैंने न्याय विभाग को तुरंत इस मामले की जांच शुरू करने का निर्देश दिया है। पेट्रोल-डीज़ल की कीमतें अभी जितनी तेज़ी से कम हो रही हैं, उससे कहीं ज़्यादा तेज़ी से कम होनी चाहिए।"
ट्रंप ने बार-बार कहा है कि ईरान के साथ युद्ध खत्म होने और होर्मुज स्ट्रेट के फिर से खुलने पर पेट्रोल-डीज़ल की कीमतें तेज़ी से गिरेंगी। हालांकि ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद से तेल की कीमतें गिरी हैं, लेकिन कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि सामान्य लोगों के लिए पेट्रोल-डीज़ल की कीमतें युद्ध से पहले के स्तर पर वापस आने में शायद कई महीने लग जाएंगे।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है। ईरान-अमेरिका इज़रायल युद्ध की वजह से भारत में भी पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों में इजाफा देखने को मिला। हालांकि काफी समय तक तेल कंपनियों ने दाम नहीं बढ़ाए, लेकिन फिर मई में चार बार कीमतों में इजाफा देखने को मिला। तेल कंपनियों ने अपने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया और इसी वजह से अभी भी कीमतें कम नहीं हो रही हैं। इसके साथ ही रिफाइनिंग कॉस्ट, ट्रांसपोर्ट, डीलर कमीशन, शिपिंग में देरी और रूपए की विनिमय दर पर प्रभाव पड़ने की वजह से भी पेट्रोल-डीज़ल की कीमतें बढ़ी हैं। हालांकि अब एक बार फिर होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते से भारत में कच्चे तेल की सप्लाई शुरू हो गई है, लेकिन पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों के कम होने के लिए लोगों को काफी इंतज़ार करना पड़ सकता है।