15 अगस्त 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होंगे पीएम मोदी? ईरान के न्योते ने भारत के सामने खड़ी की बड़ी कूटनीतिक चुनौती

Iran PM Modi Funeral Invite: अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पीएम मोदी को ईरान का न्योता मिला है। अब भारत के सामने सबसे बड़ा सवाल है कि तेहरान कौन जाएगा और इस फैसले का अमेरिका, इजरायल व खाड़ी देशों के साथ रिश्तों पर क्या असर पड़ सकता है? जानिए पूरा मामला।
3 min read
Google source verification

भारत

image

Rahul Yadav

Jun 25, 2026

PM Modi, PM Modi Iran Call, Masoud Pezeshkian, Iran President, India Iran Relations, West Asia News, Middle East Conflict, Iran Israel Conflict, Narendra Modi News,

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो - आईएएनएस)

Ali Khamenei Funeral India Invite: ईरान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होने का निमंत्रण भेजा है। इस आमंत्रण ने नई दिल्ली के सामने एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। ईरान के साथ अपने पुराने ऐतिहासिक संबंधों को बनाए रखने और दूसरी तरफ अमेरिका व इजरायल के साथ मजबूत होते रणनीतिक रिश्तों के बीच संतुलन साधने के लिए भारत को इस मोर्चे पर बेहद फूंक-फूंक कर कदम रखना होगा।

अयातुल्ला अली खामेनेई इसी साल 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमलों में मारे गए थे। उनकी शोक यात्राएं तेहरान, कोम और इराक के कुछ हिस्सों में निकालने के बाद 4 से 9 जुलाई के बीच उन्हें मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

पीएम मोदी के जाने की संभावना कम, वरिष्ठ प्रतिनिधि भेजने पर विचार

अंतिम संस्कार के इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खुद शामिल होने की संभावना न के बराबर है। अंग्रेजी अखबार 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार ने अभी तक आधिकारिक तौर पर प्रतिनिधित्व के स्तर की घोषणा नहीं की है लेकिन उसी समय के आसपास प्रधानमंत्री का पहले से ही एक बहुदेशीय विदेशी दौरा तय है। हालांकि, दुनिया भर की राजधानियों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस संवेदनशील मौके पर भारत का प्रतिनिधित्व कौन करेगा।

वहीं, 'द टाइम्स ऑफ इंडिया' की रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली है कि नई दिल्ली तेहरान में एक उच्च-स्तरीय या वरिष्ठ प्रतिनिधि भेजने पर विचार कर रहा है और इस संबंध में अंतिम फैसला आने वाले कुछ दिनों में ले लिया जाएगा।

अमेरिका-इजरायल का फैक्टर और कूटनीतिक 'कर्ज'

खामेनेई की मौत जिन हालातों में हुई है उसने भारत के फैसले को और अधिक जटिल बना दिया है, क्योंकि वे अमेरिका और इजरायल के साथ सीधे सैन्य टकराव के पहले ही दिन मारे गए थे। इन हमलों के बाद भारत ने शुरुआती तौर पर पूरी तरह चुप्पी साधे रखी थी। इसके बाद भारत की ओर से पहला औपचारिक कदम तब दिखा, जब विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने नई दिल्ली में ईरानी दूतावास जाकर शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री मोदी लगातार ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत, संयम और संप्रभुता के सम्मान की वकालत करते रहे हैं।

इस पूरे घटनाक्रम पर रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्म चेलानी का कहना है कि जुलाई में होने वाला यह राजकीय अंतिम संस्कार भारत को बेहद नाजुक स्थिति में खड़ा करता है। फरवरी में खामेनेई की हत्या पर चुप्पी साधने के बाद भारत पर अब संतुलित रुख दिखाने का दबाव भी माना जा रहा है।

ऐसे में वहां बहुत हाई-प्रोफाइल मौजूदगी दर्ज कराने से वाशिंगटन और तेल अवीव (इजरायल) के नाराज होने का जोखिम है। दूसरी तरफ, सैन्य विशेषज्ञ और लेखक प्रविण साहनी का मानना है कि इस जनाजे में पीएम मोदी का शामिल होना या न होना भारत की विदेश नीति का एक बड़ा लिटमस टेस्ट साबित होगा।

इससे पहले मई 2024 में जब ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी का हेलीकॉप्टर हादसे में निधन हुआ था, तब भारत ने तय प्रोटोकॉल के तहत तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को तेहरान भेजा था।

चाबहार पोर्ट का भविष्य और घरेलू समीकरणों का गणित

ईरान के साथ भारत के संबंध सिर्फ कूटनीतिक प्रतीकों तक सीमित नहीं हैं। इसके पीछे गहरे रणनीतिक हित हैं। भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण निवेश चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट है जो पाकिस्तान को बाईपास करके अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक भारत को सीधी व्यापारिक पहुंच देता है।

अप्रैल 2026 में अमेरिकी प्रतिबंधों की छूट की अवधि खत्म होने और क्षेत्रीय संघर्षों के कारण इस प्रोजेक्ट को हाल के महीनों में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। विशेषज्ञ ब्रह्म चेलानी के मुताबिक, अंतिम संस्कार में एक वरिष्ठ प्रतिनिधि को भेजना यह संकेत देगा कि नई दिल्ली अपनी ईरान नीति को अमेरिका या इजरायल के दबाव में तय नहीं होने देना चाहता।

इसके अलावा, भारत की ऊर्जा सुरक्षा भी इस क्षेत्र से जुड़ी है। ईरान की भौगोलिक स्थिति स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बेहद करीब है, जहां होने वाली किसी भी हलचल का सीधा असर भारत के तेल आयात पर पड़ता है।

खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों के कारण भी इस क्षेत्र में स्थिरता भारत की प्राथमिकता है। कूटनीति के साथ-साथ भारत के अपने घरेलू समीकरण भी इससे प्रभावित होते हैं क्योंकि ईरान के बाद दुनिया की सबसे बड़ी शिया मुस्लिम आबादी भारत में ही निवास करती है। अयातुल्ला खमेनेई वैश्विक शिया समुदाय के सर्वोच्च नेता थे, इसलिए भी उनका अंतिम संस्कार नई दिल्ली के लिए बेहद मायने रखता है।