
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। (फोटो- IANS)
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पक्ष में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने ट्रंप को एक बड़ी राहत देते हुए बॉर्डर पर शरण चाहने वालों को रोकने वाली नीति को मंजूरी दे दी है।
कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि जब मैक्सिको बॉर्डर पर भीड़ बहुत ज्यादा हो तो अधिकारी दावा करने वालों को अंदर आने से रोक सकते हैं। यह फैसला 6-3 के बहुमत से आया, जिसमें तीन महिला जजों ने विरोध जताया।
लिबरल जज सोनिया सोतोमेयर ने पक्ष में फैसले का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इस फैसले से बॉर्डर पर और ज्यादा लोग मरेंगे। लोग खतरे भरे रास्तों से गुजरेंगे, कुछ अवैध तरीके से घुसने की कोशिश करेंगे और कई हिंसा का शिकार होंगे।
सोतोमेयर ने कहा कि लोग अपनी जाति, धर्म या राजनीतिक विचारों की वजह से परेशान हैं, उन्हें और मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।
वहीं, जस्टिस अलिटो, जिन्होंने ट्रंप के पक्ष में फैसला रखा, उन्होंने सोतोमेयर के विरोध का जवाब भी कोर्ट में दिया। उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका पहुंचने का मतलब है असल में अंदर आ जाना, सिर्फ बॉर्डर पर खड़े होना नहीं।
अमेरिका में यह नीति पुरानी है। यह ओबामा के समय 2016 में शुरू हुई थी। बॉर्डर पर अचानक लोगों की भीड़ बढ़ने के बाद यह नीति शुरू हुई थी। ट्रंप के पहले कार्यकाल में 2018 में इसे औपचारिक रूप दिया गया। बाइडेन ने 2021 में इसे बंद कर दिया था।
अब ट्रंप प्रशासन इसे फिर शुरू करने की तैयारी में है। इस नीति के तहत अधिकारी तय करते हैं कि मौजूदा क्षमता से ज्यादा लोग हैं या नहीं। अगर हैं तो शरण के दावे को तुरंत नहीं सुनते और लोगों को मैक्सिको तरफ ही रोक देते हैं।
इसी दिन सुप्रीम कोर्ट ने एक और महत्वपूर्ण फैसला दिया। इसमें हैती और सीरिया के लाखों लोगों को दिए गए टेम्पररी प्रोटेक्टेड स्टेटस (टीपीएस) को हटाने का रास्ता साफ किया गया। इससे 3।5 लाख से ज्यादा हैतियाई और 6100 सीरियाई लोगों पर डिपोर्टेशन का खतरा मंडरा रहा है।
Published on:
25 Jun 2026 09:49 pm
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