
वेनेजुएला में भूकंप के बाद सड़कों पर लोग। (फोटो- IANS)
वेनेजुएला में जोरदार भूकंप के बाद अब तक 164 लोगों की जान चली गई हैष। वहीं, 975 लोगों के घायल होने की सूचना है। जोरदार भूकंप से गिरे इमारतों में फंसे लोगों को बचाने का काम जारी है।
इस बीच, अमेरिकी संस्था का दावा है कि मौत और घायलों का आंकड़ा 10 हजार के पार जा सकता है। चूंकि वेनेजुएला में मीडिया और सोशल मीडिया काफी सरकार के दबाव में नियंत्रित है, इस वजह से मरने वालों या घायलों का असली आंकड़ा अभी भी आधिकारिक नंबरों से काफी दूर है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र ने वेनेजुएला से मीडिया कवरेज को लेकर खास अपील की है।
बता दें कि वेनेजुएला सरकार की एजेंसी कॉनटेल ने देश में सोशल मीडिया और कई न्यूज साइट्स को ब्लॉक कर रखा है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र की फैक्ट-फाइंडिंग मिशन ने तुरंत सब कुछ खोलने की अपील की है। ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों की जान बचाई जा सके और असली आंकड़ा पूरी दुनिया के सामने आ सके। संयुक्त राष्ट्र ने वेनेजुएला से यह तक कह दिया है कि यह जीवन-मृत्यु का मामला है, इससे कोई भी समझौता नहीं की जानी चाहिए।
वेनेजुएला में मीडिया पर नियंत्रण काफी समय से रखा जा रहा है। हुगो चावेज के समय से शुरू हुआ यह सिलसिला निकोलस मादुरो के राज में और सख्त हो गया।
सरकार का कहना है कि यह देश की सुरक्षा और स्थिरता के लिए जरूरी है, लेकिन आलोचक इसे विरोध की आवाज दबाने का तरीका बताते हैं। देश में स्वतंत्र मीडिया लगभग खत्म हो चुका है। मादुरो के शासन में सैकड़ों रेडियो स्टेशन, टीवी चैनल और अखबार बंद कर दिए गए।
कॉनटेल वेनेजुएला में लाइसेंस रिन्यू करने या छोटी-मोटी गलती का बहाना लेकर इन पर कार्रवाई करती है। असली वजह अक्सर सरकार की आलोचना होती है। कई पत्रकारों को धमकी मिलती है, गिरफ्तार किया जाता है या उन्हें सेल्फ सेंसरशिप करना पड़ता है।
वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाला देश है, फिर भी यहां भुखमरी, दवाइयों की कमी और महंगाई ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। लाखों लोग देश छोड़कर भाग गए। सरकार नहीं चाहती कि ये सारी असफलताएं खुलकर सामने आएं। इसलिए स्वतंत्र मीडिया को दबाया जाता है।
चुनाव के समय यह कंट्रोल और बढ़ जाता है। विपक्षी नेताओं के इंटरव्यू बंद, आलोचनात्मक खबरें ब्लॉक और सोशल मीडिया पर सरकार समर्थक ट्रोल आर्मी सक्रिय हो जाती है। लोगों को डर है कि अगर उन्होंने सरकार के खिलाफ कुछ लिखा तो उन्हें जेल हो सकती है।
आज के भूकंप के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है। लोग बचाव की खबर, सुरक्षित जगह की जानकारी या मदद के लिए सोशल मीडिया पर निर्भर थे। लेकिन ब्लॉकेज की वजह से सही खबर पहुंचने में देरी हो रही है।
अफवाहें फैल रही हैं, जो संकट को बढ़ा सकती हैं। संयुक्त राष्ट्र ने साफ कहा है कि ऐसे वक्त में सूचना का अधिकार जान-मौत का सवाल है। कॉनटेल को तुरंत सब खोलना चाहिए।
Updated on:
25 Jun 2026 06:21 pm
Published on:
25 Jun 2026 06:21 pm
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