
प्रतीकात्मक तस्वीर - IANS
Iraq oil production: पश्चिम एशिया में ईरान पर अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों का असर वैश्विक स्तर पर दिखाई दे रहा है। एक तरफ जहां दुनिया के कई देशों को ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ कई देशों की आर्थिक स्थिति भी बिगड़ गई है। इन देशों में इराक भी शामिल है। ऐसे में युद्ध की वजह से कमजोर हुई अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए इराक OPEC में अपने उत्पादन कोटे में उल्लेखनीय बढ़ोतरी चाहता है। इसके लिए वह सभी उपलब्ध विकल्पों पर विचार कर रहा है। यहां तक कि उसने संगठन छोड़ने की संभावना पर भी मंथन किया है। इराकी तेल नीति से जुड़े सूत्रों के हवाले से रॉयटर्स ने यह जानकारी दी है।
रिपोर्ट में इराक के तेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि ईरान के साथ युद्ध के कारण बगदाद गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहा है। ऐसे में इराक चाहता है कि ओपेक में उसके उत्पादन कोटे में बड़ी बढ़ोतरी की मांग को गंभीरता से लिया जाए। रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए इराक ने OPEC छोड़ने के विकल्प पर भी विचार किया था। हालांकि, उसने इस योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। अब उसकी योजना संगठन में बने रहने और अधिक उत्पादन कोटा हासिल करने की है।
अधिकारी के अनुसार, सऊदी अरब और ओपेक के अन्य सहयोगी देशों को इस मुद्दे को बेहद गंभीरता से लेना चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो इराक को सभी उपलब्ध विकल्पों पर विचार करना पड़ सकता है। उधर, ओपेक की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के प्रयासों के बीच इराक के सरकारी प्रवक्ता ने कहा है कि उनका देश अपनी पूरी तेल निर्यात क्षमता बहाल करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। साथ ही, आने वाले वर्षों में तेल उत्पादन बढ़ाकर प्रतिदिन 70 लाख बैरल तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। यहां बता दें कि इराक चाहता है कि OPEC उसकी उत्पादन क्षमता और जनसंख्या के अनुरूप तेल उत्पादन बढ़ाने की अनुमति दे।
उधर, मई में पद संभालने वाले इराक के प्रधानमंत्री अली फलिह कादिम अल-जैदी ने भी संकेत दिया है कि देश की अर्थव्यवस्था का पुनर्निर्माण, विदेशी निवेश आकर्षित करना और भ्रष्टाचार से लड़ना उनकी सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल होगा। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद तेल की कीमतों में और गिरावट दर्ज की गई तथा कच्चा तेल 73 डॉलर प्रति बैरल से नीचे कारोबार करने लगा।
अगर इराक वास्तव में ओपेक से अलग होने का फैसला करता है, तो यह संगठन के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। इराक न सिर्फ OPEC का दूसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है, बल्कि वह इसके पांच संस्थापक सदस्यों में भी शामिल रहा है। खास बात यह है कि OPEC की स्थापना भी इराक की राजधानी बगदाद में हुई थी। ऐसे में इराक का संगठन से अलग होना OPEC की एकता और प्रभाव दोनों पर सवाल खड़े कर सकता है।
Published on:
25 Jun 2026 03:19 pm
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