
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। (Photo- IANS)
अमेरिका के दावे को ईरान ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है। राष्ट्रपपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस स्विट्जरलैंड में ईरान से बातचीत के बाद खुले मंच पर यह बयान दिया था कि वह ईरान के जब्त पैसों से अमेरिकी फसल खरीदकर तेहरान भेजेंगे।
अब इस दावे को ईरान ने खारिज कर दिया है। इरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने साफ कहा- अमेरिका झूठ बोल रहा है। हमारे जब्त पैसे अमेरिकी फसल खरीदने में नहीं लगेंगे।
साथ ही ईरान संसद के स्पीकर ने व्यंग्य करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच दशकों का अविश्वास ही असली फसल है, हम तो बस वही फसल काट रहे हैं जो आपने ही बोई थी। यह पूरी तरह से ऑर्गेनिक, भरपूर और यहीं की उपज है।
उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप और वेंस के बयानों से यह लगाता है कि अमेरिका सिर्फ सोयाबीन, झूठे वादे और बकवास बातें ही एक्सपोर्ट करता है। यह बयान स्विट्जरलैंड में हालिया बातचीत के बाद आया है, जहां अमेरिका-ईरान के बीच कुछ समझौते की कोशिश हुई।
वेंस और ट्रंप ने दावा किया था कि कोई भी रिलीज होने वाला पैसा अमेरिकी सोयाबीन, मक्का और गेहूं खरीदने में इस्तेमाल होगा। ट्रंप ने तो यहां तक कहा कि यह पैसे कंट्रोल में रहेंगे और सिर्फ अमेरिकी किसानों को फायदा पहुंचाएंगे।
वहीं, ईरान के सख्तपंथी नेता इस प्रस्ताव से खासे नाराज हैं। गालिबाफ जैसे नेता मानते हैं कि अमेरिका पुराने वादों को तोड़ने और दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। ईरान कह रहा है कि उसके पैसे पर कोई और फैसला नहीं लेगा।
ईरान का रुख साफ है- पैसा उसका है, इस्तेमाल भी वह खुद तय करेगा। बता दें कि दोनों देशों के बीच यह तनातनी नई नहीं है। सालों से प्रतिबंध, परमाणु मुद्दा और क्षेत्रीय तनाव ने रिश्तों को खराब रखा है।
हाल में स्विट्जरलैंड की बैठक में 12 अरब डॉलर के फ्रोजन फंड्स रिलीज करने पर कुछ सहमति बनी, लेकिन अमेरिका इसे अपनी शर्तों से जोड़ना चाहता है। ईरान इसे अपनी जीत बता रहा है, जबकि वाशिंगटन इसे किसानों के लिए अच्छा सौदा बता रहा है।
Published on:
25 Jun 2026 07:40 pm
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