
Strait of Hormuz Crisis: पश्चिम एशिया इस समय ऐसे दोराहे पर खड़ा है जहां कूटनीति के तमाम रास्ते बंद होते नजर आ रहे हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के कड़े तेवर और अमेरिकी नौसैनिक दबाव ने व्यापारिक समुद्री जहाजों की आवाजाही ठप कर दी है। दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कूटनीतिक चालों और इस्राइल के गाजा शांति प्रस्ताव को सीधे खारिज करने के फैसले ने पूरे क्षेत्र में महायुद्ध की आशंका को भड़का दिया है।
समुद्री सुरक्षा एजेंसी 'यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस' (UKMTO) की ताजा रिपोर्ट ने दुनिया भर की चिंताओं को बढ़ा दिया है। एजेंसी के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य में खतरा गंभीर स्तर पर पहुंच चुका है। शनिवार को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के एक तेल टैंकर पर हुए हमले के बाद से इस मार्ग से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों की संख्या इकाई के आंकड़ों (सिंगल डिजिट) में सिमट कर रह गई है।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) समुद्र में लगातार अपनी आक्रामक मौजूदगी दर्ज करा रही है। वाणिज्यिक जहाजों को रेडियो संदेशों के जरिए चेतावनी देना, उनके ऊपर से टोही ड्रोन (UAV) उड़ाना और समुद्री माइन बिछाने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। ओमान के दक्षिणी तटीय इलाकों (लीमाह-खासाब-कुमजार) के पास लगातार धमाकों और मिसाइल हमलों की खबरें आ रही हैं, जिससे दुनिया का सबसे व्यस्त तेल मार्ग लगभग जाम हो चुका है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान संकट पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि अमेरिका तेहरान के साथ केवल ‘औपचारिक/अर्ध-वार्ता’ (Semi-Negotiating) कर रहा है। ट्रंप का मुख्य मकसद ईरान पर जबर्दस्त आर्थिक दबाव बनाना है ताकि तेहरान झुकने को मजबूर हो।
इसके जवाब में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका से कोई सीधी बातचीत नहीं चल रही है, हालांकि कुछ मध्यस्थ देश बातचीत की जमीन तलाशने में जुटे हैं। अराघची ने ओमान के साथ हो रही वार्ताओं का हवाला देते हुए साफ कर दिया कि जब तक अमेरिका नौसैनिक नाकेबंदी पूरी तरह खत्म नहीं करता और ईरान की शर्तें नहीं मानता, तब तक होर्मुज का समुद्री मार्ग सामान्य नहीं होगा।
ईरान के भीतर भी सत्ता का समीकरण तेजी से बदल रहा है। सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने रिवोल्यूशनरी गार्ड के पूर्व कमांडर मोहसिन रेजाई को देश की सबसे शक्तिशाली सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में अपना विशेष प्रतिनिधि नियुक्त किया है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि एक पूर्व सैन्य कमांडर को यह जिम्मेदारी सौंपना इस बात का संकेत है कि तेहरान अब किसी भी सैन्य टकराव के लिए कमर कस चुका है।
उधर, इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका की मध्यस्थता वाले गाजा शांति समझौते को दो टूक खारिज कर दिया है। नेतन्याहू का कहना है कि जब तक हमास का पूरी तरह निरस्त्रीकरण नहीं हो जाता, तब तक इस्राइली सेना गाजा से पीछे नहीं हटेगी। इस रुख से शांति की बची-खुची उम्मीदों पर भी पानी फिर गया है।