
चीन-ताइवान विवाद
Taiwan Drones: चीन से संभावित सैन्य टकराव के खतरे के बीच ताइवान अपनी रक्षा रणनीति में ड्रोन और मानवरहित हथियारों की भूमिका बढ़ा रहा है। द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ताइवान बड़ी संख्या में हवाई ड्रोन और मानवरहित हमलावर नौकाओं का बेड़ा तैयार कर रहा है। इसका मकसद चीनी सेना के संभावित हमले की स्थिति में उसके सैनिकों और युद्धपोतों को रोकना है। रिपोर्ट के अनुसार, ताइवान यूक्रेन से मिली युद्ध की सीख के आधार पर अपनी रणनीति तैयार कर रहा है। यूक्रेन ने रूस जैसे बड़े सैन्य प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ कम लागत वाले और तेजी से इस्तेमाल किए जा सकने वाले ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया है।
अमेरिकी सैन्य कमांडरों ने ताइवान की इस रणनीति को 'हेलस्केप' नाम दिया है। इसका मकसद ड्रोन, मिसाइल और तोपों की लगातार लहरों के जरिए हमलावर सेना को इतना नुकसान पहुंचाना है कि चीन के लिए समुद्र के रास्ते ताइवान पर हमला करना बेहद जोखिम भरा हो जाए, ताइवान के सैनिकों को भी तेजी से आगे बढ़ने और ड्रोन से मिलने वाली जानकारी का इस्तेमाल करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। इन ड्रोन का इस्तेमाल चीनी सैनिकों की गतिविधियों का पता लगाने और जरूरत पड़ने पर उन पर हमला करने के लिए किया जा सकता है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि ताइवान सरकार 2030 तक हर महीने 1 लाख ड्रोन बनाने की क्षमता विकसित करना चाहती है। इनमें से करीब आधे ड्रोन का निर्यात करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके जरिए ताइवान खुद को वैश्विक ड्रोन उद्योग में एक प्रमुख शक्ति के रूप में स्थापित करना चाहता है। इसके अलावा ताइवान की सेना करीब 2.10 लाख हवाई और समुद्री ड्रोन हासिल करने की योजना पर भी काम कर रही है। इनमें निगरानी के साथ-साथ हमले में इस्तेमाल होने वाले मानवरहित सिस्टम शामिल हो सकते हैं।
ताइवान सिर्फ हवाई ड्रोन पर निर्भर नहीं रहना चाहता। वह मानवरहित हमलावर नौकाओं का बेड़ा भी तैयार कर रहा है। इनका इस्तेमाल समुद्र में चीनी नौसेना की गतिविधियों पर नजर रखने और संभावित हमले की स्थिति में उसे निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन की लंबी दूरी की हमले की क्षमता से मिली सीख के आधार पर ताइवान चीन के बंदरगाहों से निकलने वाले सैन्य जहाजों को भी निशाना बनाने की क्षमता विकसित करने पर विचार कर सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, ताइवान के लिए ड्रोन हासिल करना अपेक्षाकृत आसान हिस्सा है। असली चुनौती इन्हें बड़े पैमाने पर युद्ध में प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने की है। इसके लिए सेना के संगठन, प्रशिक्षण और युद्ध रणनीति में बदलाव करना होगा। सैनिकों को ड्रोन के झुंड को एक साथ संचालित करने, उनसे मिलने वाली खुफिया जानकारी का तेजी से विश्लेषण करने और उसे अलग-अलग सैन्य इकाइयों तक पहुंचाने की क्षमता विकसित करनी होगी।
रिपोर्ट के अनुसार, ताइवान ने हाल ही में लिटोरल कॉम्बैट कमांड बनाया है। इसमें ड्रोन, मोबाइल मिसाइल और तोपखाने को एक साथ जोड़कर तटीय रक्षा व्यवस्था तैयार की जा रही है।
चीन और ताइवान के बीच दूरी करीब 110 मील है। चीन स्वशासित ताइवान को अपना हिस्सा बताता है और चीनी नेतृत्व ने इसे हासिल करने के लिए बल प्रयोग की संभावना से इनकार नहीं किया है। ऐसे में ताइवान अपनी रक्षा क्षमता को मजबूत करने के लिए ड्रोन और मानवरहित हथियारों पर तेजी से निवेश कर रहा है।
Updated on:
09 Aug 2026 10:35 pm
Published on:
09 Aug 2026 10:33 pm
