US-Iran War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा कि जब तक होर्मुज स्ट्रेट नहीं खुलता, तब तक कोई युद्धविराम (Ceasefire) नहीं होगा। जानिए पूरी खबर।
Donald Trump : मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक बार फिर बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए पूरी तरह से नहीं खोला जाता, तब तक किसी भी तरह के युद्धविराम ( पर विचार नहीं किया जाएगा।
बुधवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने अमेरिका से सीजफायर की गुजारिश की है। ट्रंप ने लिखा, "ईरान के नए शासन के राष्ट्रपति, जो अपने पूर्ववर्तियों की तुलना में कम कट्टर और कहीं अधिक बुद्धिमान हैं, ने अभी-अभी संयुक्त राज्य अमेरिका से युद्धविराम का अनुरोध किया है!" लेकिन इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपनी शर्त और आक्रामक इरादे भी साफ कर दिए। उन्होंने आगे लिखा, "हम इस पर तभी विचार करेंगे, जब होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह से खुला, स्वतंत्र और सुरक्षित होगा। तब तक हम उन्हें पूरी तरह से तबाह कर देंगे, या जैसा कि कहा जाता है, उन्हें वापस 'पाषाण युग' में धकेल देंगे!"
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा इसी संकरे समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है। युद्ध के कारण इस मार्ग के अवरुद्ध होने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मची हुई है और कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमतें आसमान छू रही हैं। अमेरिका चाहता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और विशेषकर भारत व एशियाई देशों को हो रहे ऊर्जा संकट के नुकसान को रोकने के लिए ईरान इस रास्ते को बिना शर्त खोले।
इससे पहले ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान के मध्यस्थों के जरिए ईरान को 15 सूत्री शांति प्रस्ताव भी भेजा था। इस योजना में एक महीने के युद्धविराम, ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक, हमास और हिजबुल्लाह जैसे प्रॉक्सी गुटों को समर्थन बंद करने और होर्मुज को फिर से खोलने जैसी शर्तें शामिल थीं। इसके बदले में अमेरिका ने कुछ प्रतिबंधों में ढील देने का जिक्र किया था।
फिलहाल, ट्रंप के इस ताज़ा अल्टीमेटम से साफ है कि अमेरिका सैन्य दबाव कम करने के मूड में नहीं है। अगर होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान अपना रुख नरम नहीं करता है, तो आने वाले दिनों में खार्ग द्वीप स्थित ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र और उसके पावर प्लांट्स पर बड़े अमेरिकी हमले देखने को मिल सकते हैं।
ईरान ने 28 फरवरी 2026 को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) विदेशी वाणिज्यिक और सैन्य जहाजों के लिए बंद कर दिया था। यह कदम अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर किए गए सैन्य हमलों और युद्ध भड़कने के तुरंत बाद उठाया गया था। इससे जुड़े कुछ प्रमुख घटनाक्रम इस प्रकार हैं:
18-20 फरवरी 2026: युद्ध पूरी तरह शुरू होने से पहले ही ईरान ने दबाव बनाने की रणनीति के तहत जलडमरूमध्य को अस्थायी रूप से बंद करने की घोषणा की थी।
28 फरवरी 2026: युद्ध की शुरुआत के साथ ही ईरान ने इस मार्ग को ब्लॉक कर दिया और विदेशी जहाजों की आवाजाही पर रोक लगा दी।
2 मार्च 2026: ईरान के इस्लामिक रिवोल्युशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की कि यह अहम समुद्री मार्ग अमेरिका और उसके सहयोगियों जैसे "गैर-मित्र देशों" (Unfriendly Nations) के लिए बंद कर दिया गया है। केवल उन्हीं जहाजों को गुजरने दिया जाएगा जिन्हें ईरानी नौसेना मंजूरी देगी।
वर्तमान स्थिति (मार्च/अप्रेल 2026): हाल ही में ईरान की संसद ने 'होर्मुज प्रबंधन योजना' को मंजूरी दी है। इसके तहत अमेरिका और इजरायल के जहाजों की एंट्री पूरी तरह से बैन है। जिन अन्य देशों (जैसे भारत) के व्यापारिक जहाजों को ईरान यहां से सुरक्षित गुजरने की छूट दे रहा है, उनसे अब 'टोल' वसूलने की तैयारी की जा रही है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और पश्चिमी देशों के व्यापार के लिहाज से यह जलमार्ग 28 फरवरी से ही मुख्य रूप से बाधित चल रहा है, जिसके कारण दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है।