
अमेरिका (United States of America) ने ईरान (Iran) के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई पर रोक लगाने के साथ ही कूटनीति और बातचीत पर जोर देने का फैसला लिया है जिससे एक बार फिर सीज़फायर हो सके और दोनों देशों के बीच शांति समझौता लागू किया जा सके। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने यह भी कहा है कि दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है। कुछ दिन पहले यूक्रेन (Ukraine) के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेन्स्की (Volodymyr Zelenskyy) ने दावा किया था कि मिडिल ईस्ट में हमलों के लिए रूस (Russia) की तरफ से ईरान की मदद की जा रही है। अब इस मामले पर ट्रंप की प्रतिक्रिया सामने आ गई है।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान जब ट्रंप इस इस बारे में सवा; पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह इस बारे में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) से सवाल करेंगे और सच का पता लगाएंगे। ट्रंप ने कहा - "अगर रूस ने ऐसा किया भी है तो इसका कोई खास असर नहीं हुआ, क्योंकि हमने ईरान को बुरी तरह हरा दिया है। रूस ने वेनेज़ुएला को बहुत सारा सामान दिया। वेनेज़ुएला के पास सारा रूसी सामान था। इसका क्या नतीजा निकला? कुछ खास नहीं। हो सकता है रूस की तरफ से ईरान की मदद की जा रही हो, लेकिन अगर ऐसा हुआ भी है तो इसका कोई फायदा नहीं हुआ क्योंकि ईरान के पास न सेना है, न वायुसेना है, न नौसेना है, कुछ भी नहीं है। मुझे नहीं लगता कि रूस ऐसा कर रहा है कम से कम बड़े स्तर पर तो बिल्कुल नहीं। और अगर किया भी है तो उसका कोई खास असर नहीं हुआ है।"
ज़ेलेन्स्की ने आरोप लगाया था कि मिडिल ईस्ट में हमलों के लिए रूस की तरफ से ईरान की मदद की जा रही है। ज़ेलेन्स्की के अनुसार रूस सीधे तौर पर मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों पर हमलों के लिए ईरान की मदद कर रहा है। यूक्रेनी राष्ट्रपति का कहना है कि रूस की तरफ से मिडिल ईस्ट में अपने सैटेलाइट से ली गई जानकारी ईरान को दी जा रही है। रूस ऐसा इसलिए कर रहा है जिससे ईरान मिडिल ईस्ट में अमेरिका के सहयोगी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर सटीक हमले कर सके। ज़ेलेन्स्की के अनुसार जुलाई की शुरुआत से ही यूक्रेन ने मिडिल ईस्ट देशों और वहाँ मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर रूस के सैटेलाइट की सक्रिय निगरानी देखी है।