
अंकारा। अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान कहा कि यूएस बुधवार रात ईरान पर जोरदार हमला कर सकता है। उन्होंने यह बयान ऐसे समय दिया है जब फारस की खाड़ी में अमरीका और ईरान के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ट्रंप ने तुर्की की राजधानी अंकारा में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन में कहा कि मैं उन्हें पहले ही चेतावनी दे देता हूं कि आज रात हम उन पर जोरदार हमला करेंगे, लेकिन देखते हैं आगे क्या होता है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के साथ बैठे ट्रंप ने दोहराया कि ईरान के खिलाफ अमरीकी सैन्य अभियान अपने उद्देश्य में सफल रहा है, हालांकि ईरान में धार्मिक और सैन्य नेतृत्व अब भी सत्ता में बना हुआ है। इस बीच ईरान ने ताजा अमरीकी हमलों के जवाब में बुधवार को फारस की खाड़ी क्षेत्र में मिसाइलों और ड्रोन से जवाबी हमला किया। ईरानी सशस्त्र बलों ने कहा कि उन्होंने बहरीन और कुवैत में अमरीकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिसके बाद दोनों देशों में हवाई हमले के सायरन बजाए गए।
अमरीकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने इस पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की। उधर कतर की मंत्रिपरिषद ने ओमान तट के निकट उसके तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) वाहक जहाज पर हुए हमले के बाद ईरान से होर्मुज जलडमरूमध्य में खतरनाक गतिविधियां बंद करने की मांग की है। कतर सरकार ने बयान में कहा कि देश अपने हितों की रक्षा के लिए आवश्यक सभी कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है। कतर अमरीका और ईरान के बीच वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) के महासचिव आर्सेनियो डोमिंगुएज ने भी जहाज परिचालकों से फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाज नहीं भेजने की अपील की है।
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उन्होंने कहा कि इससे फारस की खाड़ी में फंसे लगभग 6,000 नाविकों की सुरक्षा को अनावश्यक खतरा हो सकता है। हाल के दिनों में सऊदी अरब के एक तेल टैंकर और कतर के एक एलएनजी वाहक सहित तीन वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों के बाद क्षेत्र में समुद्री यातायात को लेकर चिंता बढ़ गयी है। नाटो महासचिव मार्क रूटे ने होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों के बाद ईरानी ठिकानों पर अमरीका की अतिरिक्त सैन्य कार्रवाई का समर्थन करते हुए इसे पूरी तरह आवश्यक बताया।
शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने एक बार फिर नाटो सदस्य देशों से रक्षा व्यय को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अतिरिक्त पांच प्रतिशत तक बढ़ाने का आग्रह किया और ईरान के खिलाफ अभियान में सहयोग नहीं करने पर कई सहयोगी देशों की आलोचना की। उन्होंने तुर्की के साथ अमरीका के मजबूत होते संबंधों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि वह कई पारंपरिक सहयोगी देशों की तुलना में अमरीका के लिए अधिक भरोसेमंद साझेदार साबित हुआ है। ट्रंप ने तुर्की पर लगे कुछ अमरीकी प्रतिबंधों में ढील देने और उसे एफ-35 लड़ाकू विमान कार्यक्रम में दोबारा शामिल करने की संभावना का भी संकेत दिया, हालांकि इस कदम का इजरायल और अमरीकी कांग्रेस के एक वर्ग ने विरोध किया है।
उन्होंने तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप अर्दाेगान की सराहना करते हुए कहा कि मुझे किसी भी बात की कोई चिंता नहीं है। उन्होंने अपने देश को पहले से अधिक शक्तिशाली बनाया है। शिखर सम्मेलन के इतर ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की सहित कई विश्व नेताओं से भी मुलाकात की। रूस-यूक्रेन युद्ध पर उन्होंने कहा कि उन्हें अब भी समाधान की उम्मीद है। ट्रंप ने कहा कि दुर्भाग्य है कि इसमें इतना समय लग गया, लेकिन मुझे लगता है कि अंततः कुछ न कुछ सकारात्मक परिणाम जरूर निकलेगा।