
स्टारलिंक के टेक्नो किंग एलन मस्क।( फोटो: ANI)
Russia-Ukraine War Elon Musk Starlink System: रूस और यूक्रेन में अब ताकत और हथियारों से नहीं, तकनीक से जंग हो रही है, इसलिए अब जंग की सूरते-हाल बदल गई है, जिसमें यूक्रेन बाजी मार रहा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यूक्रेनी ड्रोन कमांडरों और पायलटों का कहना है कि रूसी सेनाएं एलन मस्क की स्टारलिंक उपग्रह इंटरनेट प्रणाली बाधित करने के लिए तरकीब लगा रहा है। रूस की सेना सामान छिपा कर और शक्तिशाली जैमिंग सिस्टम करने की कोशिश कर यूक्रेनी ड्रोन हमलों का मुकाबला करने की कोशिश कर रही है। इस बीच, मस्क ने रूसी सेना को स्टारलिंक का इस्तेमाल करने से रोक दिया है, ताकि मॉस्को इसे अपने ड्रोन हमलों में इस्तेमाल न कर सके।
रिपोर्ट के अनुसार यूक्रेन के ड्रोन हमलों से परेशान रूस ड्रोन को संचालित करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कनेक्शन जाम करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग उपकरणों का इस्तेमाल कर मस्क का स्टारलिंक सिस्टम जाम करने की कोशिश कर रहा है। रूस ने कस्बों और सैन्य सुविधाओं के पास जैमिंग डिवाइस कायम किए हैं, जिनमें से कुछ मस्क की स्पेसएक्स संचालित स्टारलिंक सिस्टम को बाधित कर सकते हैं। यह एक पायलट को ड्रोन के साथ दूर से बात करने की अनुमति देता है और पहले इसे जैमिंग से काफी हद तक अप्रभावित माना जाता था।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेन सशस्त्र बलों की 422वीं मानवरहित प्रणाली रेजीमेंट 'लुफ्वाफे' की स्पार्टा कंपनी के सेवा सदस्य रूस यूक्रेन पर किए जा रहे हमले के बीच दक्षिणी यूक्रेन में एक अज्ञात स्थान पर अज्ञात तारीख को अगली कतार के पास एक चौकी पर काम करते हुए, जोज़ुलिया मिड-स्ट्राइक ड्रोन को उड़ान के लिए तैयार कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार रूस को कीव के 'ड्रोन हमले से परेशानी हो रही है। रूस इन हमलों का मुकाबला करने के तरीके विकसित कर रहा है। यूक्रेनी कमांडरों का कहना है कि रूस ने स्टारलिंक जैमर तैनात किए हैं। उनका कहना है कि रूस भेस बदले हुए नागरिक वाहनों का भी इस्तेमाल करता है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कीव की ओर से विकसित 'मिड-स्ट्राइक' ड्रोन फ्रंट लाइन से कई किलोमीटर पीछे मौजूद टारगेट को सटीक और किफायती तरीके से निशाना बना सकते हैं। इन्हें अक्सर स्टारलिंक के जरिये ऑपरेट किया जाता है, जिसने यूक्रेन के लिए युद्ध का रूप ही बदल दिया है।
गौरतलब है कि यूक्रेन ने न केवल रूसी सैन्य लॉजिस्टिक्स को रोकते हुए रूस के कब्जे वाले क्रीमिया में ईंधन की कमी पैदा की, बल्कि सप्लाई लाइनों, ईंधन भंडारण सुविधाओं, वायु रक्षा प्रतिष्ठानों और कमांड सेंटरों पर हमले किए। रूस अब मध्यम दूरी के हमलों का मुकाबला करने के लिए कई तरीके विकसित कर रहा है, यह बात चार ड्रोन कमांडरों और पायलटों ने मीडिया को वह जगह बताई, जिसने दक्षिणी जापोरिजिया क्षेत्र में यूक्रेन की 422वीं मानवरहित प्रणाली रेजीमेंट के कार्यस्थल का दौरा किया था।
यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय के सलाहकार सेरही बेस्क्रेस्तनोव ने कहा कि रूस वोल्ना कुपोल गारंट नामक एक जैमिंग सिस्टम तैनात कर रहा है, जो लगभग 20 वर्ग किलोमीटर (7.7 वर्ग मील) के क्षेत्र में स्टारलिंक कनेक्शन को अस्थिर करने के लिए पर्याप्त मजबूत सिग्नल उत्सर्जित करता है। उन्होंने कहा कि अब तक लगभग 10 सिस्टम का पता लगाया जा चुका है।
हालांकि, यह प्रणाली खुद यूक्रेनी ड्रोन चालकों के लिए एक प्रमुख टारगेट है, जो अपनी उड़ानों में कोई भी बाधा दूर करने के लिए उत्सुक है। कोलेसनिक ने कहा कि 422वीं रेजिमेंट ने इन दो प्रणालियों को निशाना बनाने के अभियानों में भाग लिया है, जिनमें से एक को एसबीयू सुरक्षा सेवा के साथ एक संयुक्त अभियान में पता चलने के कई घंटों बाद निशाना बनाया गया था।
हमले के एक वीडियो में ड्रोन को छह बड़े, ट्रेलर जैसे कंटेनरों वाले एक स्थान पर हमला करते हुए दिखाया गया है, जिससे एक भीषण विस्फोट हुआ। 'डायरीहंट' कॉलसाइन का इस्तेमाल करने वाले एक क्रू कमांडर ने कहा, "जैसे ही हम घटनास्थल पर पहुंचे, हमारे स्टारलिंक से लैस ड्रोन बिना किसी समस्या के उड़ान भरने लगे।'
मीडिया टीम जब 422वीं रेजीमेंट के पास पहुंची, तो वहां तैनात यूक्रेनी सैनिक एक फ़िक्स्ड-विंग ड्रोन पर जबरदस्त धमाका करने वाला वॉरहेड लोड कर रहे थे। उस समय वहां रोशनी के लिए केवल हेडलैंप की हल्की लाल चमक थी। ड्रोन का प्रोपेलर इंजन पहले थोड़ा लड़खड़ाया और फिर तेजी से चलने लगा।
Updated on:
08 Jul 2026 05:51 pm
Published on:
08 Jul 2026 05:51 pm
