
इबोला (Ebola) वायरस की वजह से कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य/डीआर कांगो (Democratic Republic Of Congo / DR Congo) में स्थिति गंभीर हो गई है। कांगो में इबोला का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। इबोला के बंडीबुग्यो स्ट्रेन की वजह से देश में हाहाकार मचा हुआ है। लगातार इस बीमारी के मामले और इससे मरने वालों की संख्या बढ़ती ही जा रही है।
कांगो में इबोला की वजह से मरने वालों का आंकड़ा 3,000 पार हो गया है। सरकारी ने इस बारे में जानकारी दी है। अभी मरने वालों की संख्या और बढ़ने का खतरा बना हुआ है क्योंकि इबोला का बंडीबुग्यो स्ट्रेन काफी संक्रमणकारी है फैलता ही जा रहा है। इतना ही नहीं, एक्सपर्ट्स के अनुसार इस स्ट्रेट के लिए अब तक कोई वैक्सीन या विशिष्ट इलाज विकसित नहीं किया जा सका है।
सरकार द्वारा जारी की गई एक रिपोर्ट के अनुसार 31 अगस्त तक कांगो में इबोला के 6,186 मामलों की पुष्टि हो गई है, जिनमें 3,007 मौतें शामिल हैं। मृत्यु दर की बात करें, तो यह 48.6% हो गई है जो चिंता का विषय है। इस बीमारी से कुल 1,409 मरीज ठीक हो चुके हैं, जबकि 830 मरीज अभी भी आइसोलेशन या इबोला ट्रीटमेंट सेंटर में हैं।
इबोला ने कांगो के 6 प्रांतों में कहर बरपाया है। इन प्रांतों के नाम इतुरी, नॉर्थ किवु, साउथ किवु, हौट-उएले, बास-उएले और त्शोपो हैं, जिनके 60 हेल्थ ज़ोन को इस बीमारी ने प्रभावित किया है।
कांगो में इबोला से निपटने के प्रयासों में कई कारणों से रुकावटें आ रही हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग का कमजोर होना, पोस्टमार्टम टेस्टिंग को लेकर समुदाय का विरोध, स्टैंडर्ड इबोला ट्रीटमेंट सेंटर्स में क्षमता की कमी, संक्रमण से बचाव और नियंत्रण के सामान की कमी और फंड की कमी। लैबोरेटरी की क्षमता पर दबाव के कारण काफी परेशानी आ रही है। इसी वजह से कई टेस्ट के नतीजे अभी भी पेंडिंग हैं।
ईबोला के लक्षणों की बात करें, तो इस बीमारी से प्रभावित मरीजों में सबसे पहले तेज़ बुखार, थकान, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, गले में खराश और कमजोरी देखने को मिलती हैं। इसके बाद उल्टी, दस्त, पेट दर्द, चकत्ते, आँखों का लाल होना, किडनी में परेशानी आना और मुंह, नाक, आंखों से खून आने जैसे लक्षण भी दिखने लगते हैं।