
कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य/डीआर कांगो (Democratic Republic Of Congo / DR Congo) में इबोला (Ebola) वायरस ने हाहाकार मचाया हुआ है। देश में इस बीमारी का बढ़ना चिंता का विषय है। जानकारी के अनुसार कांगो में इस समय इबोला का बंडीबुग्यो स्ट्रेन फैल रहा है। यह इसलिए चिंता का विषय है क्योंकि एक्सपर्ट्स के अनुसार इस स्ट्रेन के लिए अब तक कोई वैक्सीन या विशिष्ट इलाज विकसित नहीं किया जा सका है। इसी बीच देश में कुल मामलों की संख्या काफी बढ़ गई है।
सोमवार को जारी ताज़ा सरकारी आंकड़ों के अनुसार डीआर कांगो में इबोला के कुल मामलों की संख्या 6,000 से ज़्यादा होने की पुष्टि हो गई है। कुल संख्या 6,041 पहुंच ग़ई है।
डीआर कांगो में हर दिन इस घातक वायरस की वजह से और लगभग 3,000 लोगों की मौत हुई है। अभी यह आंकड़ा और बढ़ने की आशंका है।
स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि इस गंभीर बीमारी से अब तक 1,366 मरीज़ ठीक हो चुके हैं। इबोला प्रकोप ने देश में इतुरी, नॉर्थ किवु, साउथ किवु, हौट-उएले, बास-उएले और त्शोपो प्रांतों के 60 हेल्थ ज़ोन को प्रभावित किया है।
ईबोला संक्रमण की शुरुआत में तेज़ बुखार, थकान, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, गले में खराश और कमजोरी होती है। बाद में उल्टी, दस्त, पेट दर्द, चकत्ते, आँखों का लाल होना, किडनी में परेशानी आना और मुंह, नाक, आंखों से खून आने जैसे लक्षण भी दिखने लगते हैं।
इबोला के बंडीबुग्यो स्ट्रेन के लिए कोई वैक्सीन नहीं होने की वजह से इस बीमारी के इलाज में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार इस बीमारी से निपटने के प्रयासों में अन्य कई रुकावटें भी आ रही हैं, जैसे कि कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग का कमजोर होना, पोस्टमार्टम टेस्टिंग को लेकर समुदाय का विरोध, स्टैंडर्ड इबोला ट्रीटमेंट सेंटर्स में क्षमता की कमी, संक्रमण से बचाव और नियंत्रण के सामान की कमी, और फंड की कमी। लैबोरेटरी की क्षमता पर भी दबाव बना हुआ है और इसी वजह से कई टेस्ट के नतीजे अभी भी पेंडिंग हैं।