
EU Joins US Iran Sanctions: ईरान को लेकर अमेरिका की आर्थिक रणनीति अब अकेली अमेरिकी मुहिम नहीं रह गई है। यूरोपीय संघ ने भी तेहरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के प्रयासों के साथ खड़े होने के संकेत दे दिए हैं। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के मुताबिक, EU की यह शुरुआती और मजबूत भागीदारी वॉशिंगटन के लिए अहम है। ऐसे समय में जब ईरान से जुड़े सैन्य तनाव और क्षेत्रीय अस्थिरता पहले ही चिंता बढ़ा रहे हैं, वित्तीय मोर्चे पर नया गठजोड़ हालात को और गंभीर बना सकता है।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दावा किया कि यूरोपीय संघ अब अमेरिका की ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ नामक आर्थिक दबाव मुहिम में शामिल हो गया है। उन्होंने EU के रुख की सराहना करते हुए कहा कि अमेरिका अपने सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान की उन वित्तीय राहों को बंद करने की कोशिश कर रहा है, जिनसे उसके परमाणु कार्यक्रम, हथियारों और क्षेत्रीय सहयोगी संगठनों को कथित तौर पर आर्थिक मदद मिलती है।
यह अभियान 24 अगस्त को अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने शुरू किया था। वॉशिंगटन का घोषित लक्ष्य ईरान से जुड़े वैश्विक आर्थिक नेटवर्क पर दबाव बढ़ाना और उसके लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था तक पहुंच मुश्किल बनाना है। अभियान का दायरा केवल ईरानी संस्थानों तक सीमित नहीं है; ईरान के साथ कारोबार करने वाली विदेशी कंपनियां और संस्थाएं भी अमेरिकी कार्रवाई के दायरे में आ सकती हैं।
यूरोपीय संघ ने 31 अगस्त-1 सितंबर की G20 बैठकों के संदर्भ में जारी बयान में कहा कि वह ईरान पर पहले से व्यापक प्रतिबंध लागू कर चुका है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कदम उठाने को तैयार है। EU ने परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों के अलावा क्षेत्रीय अस्थिरता से जुड़ी गतिविधियों पर भी चिंता जताई है। साथ ही उसने अमेरिका और अन्य G7 साझेदारों के साथ मिलकर दबाव बनाए रखने की बात कही।
अमेरिकी रणनीति का बड़ा हिस्सा बैंकिंग और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेनदेन पर दबाव बनाने से जुड़ा है। अगस्त के अंत में अमेरिकी अधिकारियों ने UAE स्थित एक बैंक की अमेरिकी वित्तीय संस्थानों तक correspondent banking पहुंच सीमित करने की दिशा में कदम उठाया था। इससे साफ संकेत मिला कि वॉशिंगटन अब ईरान से जुड़े विदेशी वित्तीय नेटवर्क पर भी नजर रख रहा है।
इसका असर केवल ईरान तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। तेल कारोबार, समुद्री परिवहन, बैंकिंग और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े देशों तथा कंपनियों को भी जोखिम का सामना करना पड़ सकता है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी दबाव के बीच ईरान की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर दिखाई देने लगा है। तेल निर्यात और विदेशी मुद्रा तक पहुंच पर दबाव बढ़ा है, जबकि महंगाई और मुद्रा संकट गहरा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज है, जहां से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। EU ने भी सुरक्षित नौवहन और इस रणनीतिक जलमार्ग में आवाजाही बहाल करने को प्राथमिकता बताया है।
अब सवाल यह है कि अमेरिका और यूरोप का संयुक्त आर्थिक दबाव ईरान को बातचीत की मेज पर लाता है या तनाव को और बढ़ाता है। फिलहाल इतना तय है कि तेहरान के खिलाफ आर्थिक मोर्चा पहले की तुलना में कहीं ज्यादा व्यापक होता जा रहा है।