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Nepal Flood Relief: भोटेकोशी बाढ़ पीड़ितों के लिए सरकार ने खोला राहत पैकेज, जानें किसे क्या मिलेगा

भोटेकोशी बाढ़ से तबाह व्यापारियों के लिए नेपाल सरकार ने राहत पैकेज घोषित किया। कस्टम ड्यूटी छूट, टैक्स राहत, लोन पुनर्गठन की सुविधा। पढ़ें पूरी खबर।
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भारत

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Anand Prakash Yadav

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Updated: 4 Sep 2026, 4:50 AM IST

Nepal Bhotekoshi flood

Nepal flood relief package: नेपाल सरकार ने गुरुवार को विनाशकारी भोटेकोशी बाढ़ से प्रभावित उद्योगों, व्यापारियों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के लिए एक व्यापक व्यापार पुनर्प्राप्ति पैकेज की घोषणा की, जिसमें सीमा शुल्क छूट, कर राहत, ऋण पुनर्गठन और बीमा दावों के तेजी से भुगतान की पेशकश की गई है। नेपाल के वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि कैबिनेट बैठक में नेपाल-चीन सीमा क्षेत्र में बाढ़ से प्रभावित व्यवसायों और आर्थिक गतिविधियों को राहत उपायों और रियायत प्रदान करने का निर्णय लिया गया।

आपदा की भयावहता

सरकार का यह कदम पिछले सप्ताह आई बाढ़ से हुई तबाही के बीच व्यवसायों को फिर से अपने संचालन को पुनर्जीवित करने में मदद करने के उद्देश्य से है। इस आपदा में गुरुवार शाम तक 1,259 लोगों की जान चली गई थी, जबकि राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार 5,083 लोग अभी भी लापता हैं।

राहत पैकेज की मुख्य बातें

जिन व्यवसायों के वाणिज्यिक वाहन और परिवहन उपकरण बाढ़ में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए या बह गए, उन्हें क्षतिग्रस्त वाहनों का पंजीकरण रद्द कराने के बाद बिना सीमा शुल्क चुकाए समान वाहन-उपकरण दोबारा आयात करने की अनुमति होगी।जिन व्यवसायों की मशीनरी, संयंत्र और उपकरण नष्ट हो गए, वे बिना सीमा शुल्क भुगतान के उसी प्रकार और मात्रा में आयात कर सकेंगे।

भोटे कोशी बाढ़ के कारण गंतव्य तक पहुंचने से पहले ही नष्ट हो चुके सामानों पर पहले चुकाए गए सीमा शुल्क को समायोजित किया जाएगा। आयातक छह महीने के भीतर किसी भी सीमा शुल्क कार्यालय से समान सामान मंगाकर पहले की राशि एडजस्ट करा सकेंगे। टैक्स रिटर्न दाखिल करने और कर भुगतान की समयसीमा मध्य अक्टूबर से बढ़ाकर 11 नवंबर कर दी गई है।

कंपनियां नष्ट हुई व्यावसायिक संपत्तियों की कीमत को एकमुश्त खर्च के तौर पर कर कटौती में दिखा सकेंगी। केंद्रीय बैंक प्रभावित व्यवसायों के लिए ऋण पुनर्गठन और पुनर्निर्धारण की व्यवस्था करेगा। वित्त मंत्रालय के अनुसार, रासुवा सीमा शुल्क से आयातित सामान गंवाने वाले उधारकर्ता व्यवसाय की प्रकृति और नुकसान के आधार पर मूलधन-ब्याज भुगतान की समयसीमा बढ़ाने की मांग कर सकेंगे। बैंकों को आर्थिक सुधार व रोजगार संरक्षण के लिए अतिरिक्त कर्ज़ देने की अनुमति होगी, जो सीधे संबंधित पक्षों के खातों में जाएगा। साथ ही बीमा प्राधिकरण को दावा प्रक्रिया आसान बनाकर मुआवज़ा भुगतान में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।