
G7 Warning on Iran: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच जी-7 देशों ने ईरान को चेतावनी दी है। जी-7 ने कहा कि ईरान की तरफ से हूतियों को हथियार और समर्थन देना क्षेत्र में संघर्ष को और बढ़ा सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हो सकता है। वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है। जी-7 ने कहा कि ईरान के कदम वैश्विक आर्थिक अस्थिरता का खतरा बढ़ा रहे हैं। यह बयान संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान हुई जी-7 विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद जारी किया गया।
जी-7 देशों ने ईरान से हूतियों को हथियार देने और उनका समर्थन करने से रोकने को कहा। बयान में कहा गया कि यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन है। जी-7 ने ईरान की गतिविधियों को संघर्ष बढ़ने का एक खतरनाक कारण बताया। समूह के मुताबिक, इसका असर सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा। अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है।
जी-7 ने यमन में हूतियों की ओर से किए जा रहे हमलों की भी निंदा की। समूह ने सऊदी अरब के खिलाफ हुए हमलों का भी जिक्र किया। जी-7 ने कहा कि ऐसी कार्रवाई क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है। इससे वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर भी दबाव बढ़ सकता है।
जी-7 ने हूतियों से सैन्य कार्रवाई और धमकियां तुरंत रोकने को कहा। खास तौर पर नागरिक जहाजों को निशाना नहीं बनाने की अपील की गई। समूह ने कहा कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए जरूरी है।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर समुद्री व्यापार पर भी पड़ रहा है। लाल सागर और बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ती सैन्य गतिविधियों से जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। बाब अल-मंडेब दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल है। इसके जरिए लाल सागर और आगे यूरोप की ओर जाने वाले जहाज गुजरते हैं।
रॉयटर्स के मुताबिक, हूतियों के बढ़ते प्रभाव और हमलों ने खाड़ी क्षेत्र से तेल की आपूर्ति पर भी दबाव बढ़ाया है। सऊदी अरब की महत्वपूर्ण पूर्व-पश्चिम तेल पाइपलाइन पर हुए ड्रोन हमले के बाद क्षेत्र से तेल की आवाजाही को लेकर चिंता बढ़ी थी। यह मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य पर दबाव कम करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
जी-7 की चेतावनी ऐसे समय आई है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण तेल और अन्य ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। लंबे समय तक तनाव जारी रहने पर इसका असर तेल की कीमतों, समुद्री परिवहन और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है। जी-7 ने इसी व्यापक जोखिम को देखते हुए ईरान और हूतियों से सैन्य गतिविधियां रोकने की मांग की है।